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पहलगाम आतंकी हमला और भारत के प्रधानमंत्री मोदी की बिहार की रैली में दिए गए चेतावनी से उपजे सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिला

हाल ही में, भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में एक बहस के दौरान बताया कि भारतीय सेना के एक संयुक्त अभियान (ऑपरेशन महादेव) में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है।  ये आतंकवादी पहलगाम  आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने इसे भारत की "सख्त आतंकवाद नीति" का उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुरक्षा बलों को बधाई दी और कहा कि इस आपरेशन से आतंकवादियों को उनके अपराध की "सही सजा" मिली है। 



ऑपरेशन महादेव के बारे में

यह ऑपरेशन भारतीय सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने चलाया था। यह ऑपरेशन 27-28 जुलाई, 2025 को चलाया गया था। इसका उद्देश्य पहलगाम हत्याकांड के जिम्मेदार आतंकवादियों को पकड़ना या मार गिराना था। 

अमित शाह ने संसद को बताया कि मारे गए तीनों आतंकवादियों में से एक हाशिम मूसा (उर्फ सुलेमान शाह) पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था। यह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। उन्होंने दो अन्य आतंकवादियों के कोडनेम भी बताएं- "अफगान" और "जिब्रान"

मारे गए यह आतंकी श्रीनगर जिले के हरवन-हिदवास क्षेत्र में छिपे हुए थे। यह क्षेत्र श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में पड़ता है। यह एक घना और दुर्गम जंगल वाला इलाका है, जो आतंकवादियों को छिपने और बचने के लिए आदर्श माना जाता है। सुरक्षा बलों को सुराग मिला था कि पहलगाम हमले के आरोपी आतंकी इसी इलाके में छिपे हुए हैं।

आतंकियों की पहचान

अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में मारे गए इन आतंकियों का संबंध पहलगाम हमले से था जैसा कि सरकार ने  दावा किया है। इस सवाल को विपक्ष ने भी उठाया है। सरकार ने इन आतंकवादियों का संबंध पहलगाम हत्याकांड से होने का निम्नलिखित सबूत संसद में पेश किया है:

  • स्थानीय लोगों और गिरफ्तार किए गए संदिग्धों ने इन आतंकवादियों की पहचान की है।
  • पाकिस्तानी वोटर आईडी कार्ड 
  • पाकिस्तानी चॉकलेट और सामान 
  • हथियार, जिनकी फॉरेंसिक जांच से पुष्टि हुई है कि यही हथियार पहलगाम हत्याकांड में इस्तेमाल हुए थे।
सरकार के यह सबूत कितने सही हैं और कितने गलत है, यह कह पाना बहुत मुश्किल है। चुकी सरकार ने यह सबूत संसद में पेश किए हैं इसलिए इसे सत्य मानकर चलना ही उचित होगा।


पहलगम आतंकी हमला 

यह हमला 22 अप्रैल, 2025 को किया गया था। इस हमले में 5 आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित और Lashkar-e-Taiba से संबंधित आतंकवादी समूह The Resistance Front (TRF) ने ली थी। हालांकि बाद में उसने अपना दावा वापस ले लिया था। 

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की अपनी एक रैली में कहा था कि "जिन्होंने यह हमला किया है उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी।" तो सवाल यह है कि क्या उनको यह सजा मिली? इस सवाल का उत्तर जानने से पहले हम यह जानते है कि आखिरकार ये साजिशकर्ता है कौन?

पहलगाम हमले के मुख्य साजिशकर्ता कौन?

प्रधानमंत्री ने बिहार की रैली में दो तरह के लोगों की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया- पहला, इस हमले को अंजाम देने वाले लोग; और दूसरा, इसके साजिशकर्ता।
  • पहला, पहलगम हमले को अंजाम देने वाले लोग: इस हमले को पाँच आतंकियों ने अंजाम दिया था। इसमें से एक आतंकवादी को जिसे पहलगाम हत्याकांड का मास्टरमाइंड कहा जा रहा था, को मार गिराया गया। 
  • दूसरा, साजिशकर्ता: पहलगाम हमले के साजिशकर्ताओं की जानकारी पकड़े गए संदिग्धों के बयानों, ड्रोन फूटेजों, आतंकवादियों से प्राप्त सबूतों और बयानों,  विशेषज्ञों की रिपोर्टों, और आम लोगों की राय से पता चलता है। ये सभी संकेत पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों, ISI और पाकिस्तानी आर्मी चीफ की तरफ जाते है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और मीडिया ने भी इशारा किया कि ISI और पाकिस्तानी सेना की सहमति या चुपचाप समर्थन के बिना इतनी बड़ी घुसपैठ और हमला संभव नहीं था। भारत ने इस हमले को राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद (State-sponsored cross-border terrorism) कहा। 

क्या पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और साजिशकर्ताओं को कड़ी सजा मिली?

भारत ने पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और सजिशकर्ताओं को कड़ी सजा देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर और महादेव चलाया। इसके अलावा अंतर्रास्ट्रीय प्रयास भी किए। कई देशों ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की। अमेरिका ने TRF को आतंकवादी संगठन घोषित किया। UN Secrity Council ने भी अपनी रिपोर्ट में TRF का नाम शामिल किया। भारत के प्रयासों के बावजूद भी FATF ने पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा तो की लेकिन उसे ग्रे या ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया। FATF ने कहा  "This, and other recent attacks, could not occur without money and the means to move funds between terrorist supporters." यानी, ऐसे हमले आतंकवादी फंडिंग और वित्तीय लेन-देन की मौजूदगी के बिना संभव ही नहीं होते हैं। यही नहीं, IMF ने भी पाकिस्तान को करीब $1 अरब का तत्काल भुगतान जारी कर दिया और नए $1.4 अरब RSF फंड को मंजूरी दे दी

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)

यह भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) के जवाब में पाकिस्तान और PoK में किए गए सटीक सैन अभियान का नाम है। यह मिशन 7 मई 2025 की रात 1:05 बजे से 1:30 बजे तक चला, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर 9 आतंकवादी ठिकानों पर सटीक वार किए। इन ठिकानों में Jaish-e-Mohammed, Lashkar-e-Taiba और Hizbul Mujahideen के रिक्रूटमेंट, प्रशिक्षण और कमांड सेंटर शामिल थे। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य आधार या नागरिक इलाके को निशाना नहीं बनाया गया। केवल आतंकवादी संरचना को निशाना बनाया गया था। भारतीय सूत्रों के अनुसार, लगभग 70 आतंकवादी मारे गए और 60 घायल हुए; जबकि पाकिस्तान ने 8–9 नागरिकों की मौत होने की जानकारी दी। इस ऑपरेशन में पाक सेना की संचार प्रणाली और साइबर कमांड को ध्वस्त कर दिया गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत ने इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी सिक्योरिटी और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया। 

ऑपरेशन महादेव (Operation Mahadev)

ऊपर हम पढ़ चुके है कि ऑपरेशन महादेव के तहत तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया। इसमें से एक को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया। 

क्या भारत पहलगाम हमले का बदल ले लिया है?

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत ने पाकिस्तान को और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को मुहतोड़ जवाब दिया है। लेकिन अभी तक भारत ने पहलगाम हमले के जिम्मेदार 1-3 आतंकियों को ही मार है। अभी भी कम-से-कम दो आतंकी बाकी है। साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर में कितने आतंकी और साजिशकर्ता मारे गए, इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 

वास्तव में, अगर देखा जाय तो पहलगाम हमले का असली साजिशकर्ता हमले को अंजाम देने वाले आतंकी नहीं, बल्कि पाकिस्तानी आर्मी और ISI है, जिन्होंने आतंकियों को सहायता, सुविधा, प्रशिक्षण और हथियार दिए है। भारत के प्रधानमंत्री ने बिहार की रैली में कहा था कि साजिशकर्ताओं को भी उनकी कल्पना से कड़ी सजा मिलेगी। तो अब सवाल यह है कि क्या उन्हें यह सजा मिली? इसका उत्तर है- नहीं; क्योंकि न तो अभी तक ISI प्रमुख मारा गया और न ही पाकिस्तान आर्मी चीफ (General Asim Munir)। पाकिस्तान ने सेना और लोगों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने के लिए आसिम मुनिर को पाकिस्तानी आर्मी का सर्वोच्च पद "Field Marshal" के रूप में प्रमोशन दे दिया। यही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशिफ मुनीर को व्हाइट हाउस में बुलाकर न सिर्फ उसके साथ लंच किया बल्कि ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने में उसकी भूमिका की प्रशंसा भी की। इसके अलावा अमेरिका ने पाकिस्तान के तेल भंडारों की खोज और विकास में निवेश करने की घोषणा की है। अमेरिका ने भारत पर कुल 35% का टैरिफ लगाया है, वहीं पाकिस्तान पर 20% का टैरिफ लगाया है। यह अमेरिका की भारत के साथ दोहरे व्यवहार को दर्शाता है। यानी अमेरिका चीन और रूस को साधने के लिए भारत का इस्तेमाल करता है, जबकि भारत को साधने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बोलता है लेकिन पाकिस्तान के जरिए अप्रत्यक्ष और चुपके से आतंकवाद को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता है। चीन पर भी यही बात लागू होता है। चीन ने तो इस तनाव में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है।

निष्कर्ष 

उपर्युक्त बातों से एक बात तो समझ में आ गई है कि भारत को कम-से-कम तीन मोर्चों पर युद्ध के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। पहला पाकिस्तान, दूसरा चीन और तीसरा संभावित अन्य देश। हमने 1971 के युद्ध में तीसरे देश के रूप में भारत के खिलाफ अमेरिका की भूमिका को देख चुके है। यह भी हो सकता है कि भविष्य में तीसरे देश के रूप में हमारा कोई पड़ोसी देश हो। इसके अलावा भारत को अपनी खुफिया एजेंसियों को और मजबूत बनाने, भविष्य की नई रक्षा तकनीकों को अपनाने, पर्याप्त रक्षा सामग्रियों और ढ़ाचों का विकास करने और सैनिकों के भविषोंमुख प्रशिक्षण आदि पर ध्यान देना चाहिए। आर्थिक स्थिति भी युद्ध में बड़ी भूमिका निभाती है, तो इस पर भी ध्यान देना चाहिए। भारत को युद्ध या तनाव के हालातों में अपनी अंतर्रास्ट्रीय  कूटनीति को और मजबूत बनाने की जरूरत हैं ताकि अन्य देश उसके साथ खड़े रहे। 

यूक्रेन ने रूस के भीतर अब तक का सबसे साहसी और सुनियोजित ड्रोन हमला कर 'ऑपरेशन स्पाइडर वेब' को अंजाम दिया

 यूक्रेन ने 1 जून 2025 को रूस के अंदर एक अभूतपूर्व और साहसी सैन्य अभियान "ऑपरेशन स्पाइडर वेब" (Operation Spider Web) को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में यूक्रेनी सुरक्षा सेवा (SBU) ने रूस के पांच रणनीतिक वायुसेना अड्डों पर एक साथ ड्रोन हमले किए, जिससे रूस की लंबी दूरी की बमवर्षक क्षमताओं को गंभीर क्षति पहुँची।


ऑपरेशन स्पाइडर वेब: कैसे हुआ अंजाम?

इस ऑपरेशन की योजना 18 महीने से अधिक समय तक बनाई गई थी और इसे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की निगरानी में SBU प्रमुख वासिल मलयुक ने संचालित किया। 117 फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन को रूस के अंदर लकड़ी के कंटेनरों में छिपाकर ट्रकों के माध्यम से तैनात किया गया। इन कंटेनरों की छतें रिमोट से खोली गईं और ड्रोन को सीधे लक्ष्यों की ओर उड़ाया गया। हमले से पहले सभी यूक्रेनी एजेंटों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया था।


किन ठिकानों पर हुए हमले?

हमले के लक्ष्य रूस के पाँच प्रमुख वायुसेना अड्डे थे:

  • बेलाया एयरबेस (इर्कुत्स्क के पास, साइबेरिया)

  • ड्यागिलेवो एयरबेस (रियाज़ान क्षेत्र)

  • इवानोवो-सेवर्नी एयरबेस (इवानोवो क्षेत्र)

  • ओलेन्या एयरबेस (मुरमांस्क क्षेत्र)

  • यूक्रेनका एयरबेस (अमूर क्षेत्र, सुदूर पूर्वी रूस)

इन हमलों में रूस के Tu-95, Tu-160, Tu-22M3 जैसे रणनीतिक बमवर्षकों और A-50 जैसे प्रारंभिक चेतावनी विमानों को निशाना बनाया गया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, 41 विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए, जबकि ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) विश्लेषकों ने कम से कम 13 विमानों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की है।


रूस को कितना नुकसान हुआ?

  • यूक्रेन का दावा है कि रूस के क्रूज़ मिसाइल ले जाने वाले विमानों के 34% को निष्क्रिय कर दिया गया।

  • हमलों से रूस को लगभग 7 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।

  • रूस की लंबी दूरी से मिसाइल हमले करने की क्षमता पर तत्काल प्रभाव पड़ा है।

  • कुछ विमान जैसे Tu-95 और Tu-22M3 पुराने हैं और उनका उत्पादन बंद हो चुका है, जिससे उनकी भरपाई मुश्किल होगी।


रूस की प्रतिक्रिया और संभावित कदम

  • रूस ने इन हमलों को "आतंकवादी हमला" करार दिया है और दावा किया है कि तीन क्षेत्रों में हमलों को विफल कर दिया गया।

  • रूसी मीडिया और सैन्य विश्लेषकों ने सुरक्षा विफलताओं पर तीखी आलोचना की है।

  • कुछ रूसी प्रचारकों ने अब "रणनीतिक परमाणु प्रतिक्रिया" की मांग की है।

  • रूस ने जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं।


शांति वार्ता और कूटनीतिक स्थिति

हमलों के तुरंत बाद इस्तांबुल में रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन यह वार्ता केवल एक घंटे में समाप्त हो गई। यूक्रेन ने रूस से कोई क्षेत्रीय रियायत देने से इनकार किया और ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि "पुतिन को कुछ नहीं मिलेगा"। हालांकि, दोनों पक्षों ने मानवीय मुद्दों पर जैसे कैदियों और सैनिकों के शवों की अदला-बदली पर सहमति जताई।


निष्कर्ष

"ऑपरेशन स्पाइडर वेब" यूक्रेन की सैन्य रणनीति में एक मील का पत्थर है, जिसने रूस की वायु शक्ति को गहरा आघात पहुँचाया है। यह ऑपरेशन न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रूस की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए

हाल ही में, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए।

यह एक व्यापक समझौता है, जो लगभग 3 वर्षों की लंबी वार्ता प्रक्रिया के बाद संपन्न हुआ है।


भारत-यूनाइटेड किंगडम FTA की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर

टैरिफ का उन्मूलनः भारत को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइन्स पर टैरिफ उन्मूलन से लाभ होगा, यह लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करेगा।

वर्तमान में, दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 बिलियन अमरीकी डॉलर है।

पेशेवरों के आवागमन को आसान बनानाः इसमें निवेशक, राइट टू वर्क के साथ किसी एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर होने वाला कंपनी का कर्मचारी और उसके जीवन-साथी एवं आश्रित बच्चे, इंडिपेंडेंट प्रोफेशनल्स आदि शामिल हैं।

दोहरा अंशदान अभिसमयः यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय श्रमिकों और उनके नियोक्ताओं को तीन वर्षों तक यूनाइटेड किंगडम में सामाजिक सुरक्षा अंशदान के भुगतान से छूट प्रदान की गई है।

प्रतिभाशाली और कुशल युवाओं के लिए अवसरः इससे यूनाइटेड किंगडम की डिजिटल रूप से वितरित सेवाओं एवं उन्नत डिजिटल अवसंरचना से लाभ मिलेगा।

निर्यात के अवसरः वस्त्र, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स, जैविक रसायन जैसे क्षेत्रकों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

सेवाओं का लाभः जैसे IT/ ITeS, वित्तीय सेवाएं आदि नए अवसर और रोजगार प्रदान करेंगे।

अन्यः गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना, बेहतर विनियामकीय पद्धतियों को बढ़ावा देना आदि।


मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बारे में

अर्थः यह एक ऐसा समझौता है, जो देशों या क्षेत्रीय समूहों के बीच व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करता है और व्यापार को बढ़ावा देता है।

वर्तमान में भारत के जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, सिंगापुर, ASEAN, मलेशिया आदि देशों के साथ FTAs हैं।

दायराः यह आमतौर पर वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को कवर करता है, लेकिन इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार (IP), निवेश, सरकारी खरीद और प्रतिस्पर्धा नीति जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के रष्ट्रपति ने कुख्यात अल्कट्राज जेल का पुनर्निर्माण करने के आदेश दिए

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने कुख्यात अल्कट्राज जेल का पुनर्निर्माण करने और उसे फिर से खोलने का निर्देश दिया है।

इस जेल को अब फिर से खतरनाक और हिंसक अपराधियों को रखने के लिए उपयोग में लाया जाएगा। यह जेल अल्कट्राज द्वीप पर स्थित है।



अल्कट्राज द्वीप के बारे में

अवस्थितिः यह कैलिफोर्निया की सैन फ्रांसिस्को की खाड़ी में (संयुक्त राज्य अमेरिका) स्थित है।

विशेषताएं: यह एक लघु निर्जन द्वीप है, जिसे आमतौर पर "द रॉक" (The Rock) कहा जाता है। पहले इसे एक किले के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बाद में इसे मिलिट्री जेल, और फिर उच्च सुरक्षा वाली संघीय जेल के रूप में उपयोग किया गया।

यह द्वीप कोरमोरेंट्स, वेस्टर्न गुल जैसे समुद्री पक्षियों तथा कई अन्य जीव-जंतुओं जैसे कि डियर माउस, स्लेंडर सैलामैंडर जैसी प्रजातियों का प्राकृतिक पर्यावास भी है।

वर्तमान में यह एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है और इसे राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।


संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 'मानव विकास रिपोर्ट, 2025' जारी की

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 'मानव विकास रिपोर्ट, 2025' जारी की। यह रिपोर्ट 'ए मैटर ऑफ चॉइसः पीपल एंड पॉसिबिलिटीज इन द एज ऑफ एआई' शीर्षक से जारी की गई है। रिपोर्ट का यह शीर्षक रेखांकित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव विकास के अगले चरण को दिशा देने में कितनी अहम भूमिका निभा रहा है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजरः

मानव विकास रिपोर्ट, 2025 में विश्व के 193 देशों में आइसलैंड 0.972 अंकों के साथ मानव विकास सूचकांक में पहले स्थान पर है जबकि दक्षिणी सूडान 0.388 अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर है।

इस रैंकिंग में भारत 130वें स्थान पर है। पिछली रिपोर्ट की तुलना में भारत की रैंकिंग में तीन स्थानों का सुधार हुआ है। भारत अभी भी "मध्यम मानव विकास" वाले देशों की श्रेणी में बना हुआ है। भारत का HDI स्कोर 0.685 है।

वैश्विक स्तर पर मानव विकास की प्रगति 1990 के बाद से सबसे धीमी रही है।

निम्न और अत्यंत उच्च HDI रैंकिंग वाले देशों के बीच असमानता लगातार चौथे वर्ष बढ़ी है।

मानव विकास सूचकांक (HDI) एक समग्र सूचकांक है, जो मानव विकास के तीन मूलभूत आयामों में औसत उपलब्धि को मापता है।

ये आयाम हैं- दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन; ज्ञान (नॉलेज) और सम्मानजनक जीवन स्तर ।

जीवन प्रत्याशाः भारत में जीवन प्रत्याशा 2023 में बढ़कर 72 वर्ष हो गई। HDI गणना की शुरुआत के बाद से भारत में यह सबसे अधिक जीवन प्रत्याशा है।

शिक्षाः भारत में स्कूली शिक्षा में व्यतीत की गई औसत अवधि अब 13 वर्ष है। 1990 में यह अवधि 8.2 वर्ष थी।



भारत की प्रगति के बावजूद चुनौतियां

राष्ट्रीय आयः विश्व में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) रैंकिंग, HDI रैंकिंग से सात स्थान नीचे है।

असमानताः पुरुषों एवं महिलाओं के बीच असमानताएं (Gender disparities) अब भी अधिक हैं। उदाहरण के लिए - लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) में भारत की रैंकिंग 102 वीं है।

भारत की निम्न रैंकिंग प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था अच्छी नहीं होने, राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व और कार्यबल में महिलाओं की कम भागीदारी का संकेत देती है।


मानव विकास रिपोर्ट 2025 में AI से जुड़े मुख्य बिंदु

भारत का AI परिदृश्यः मुख्य बिंदु

AI कौशल का विस्तारः भारत में खुद से रिपोर्ट किए गए AI कौशल का विस्तार वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है।

वैश्विक AI सूचकांकः वैश्विक AI सूचकांक में 36 देशों का मूल्यांकन किया गया। इसमें भारत चौथे स्थान पर है। इस तरह भारत इस सूचकांक में शीर्ष 10 में शामिल एकमात्र निम्न मध्यम आय वाला देश है।

प्रतिभा पलायन को रोकनाः भारत के 20% AI शोधकर्ता अब देश में ही कार्यरत हैं। 2019 में यह अनुपात लगभग शून्य था।

AI के वैश्विक प्रभाव की अपेक्षाएं: AI की वजह से रोजगार की क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि (ऑग्मेंटेशन) होगी, साथ ही ऑटोमेशन में भी वृद्धि होगी।

सर्वे में शामिल 61% लोगों ने कहा कि AI से रोजगार की क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी, जबकि जबकि 51% लोगों ने ऑटोमेशन में वृद्धि की बात स्वीकार की है।

रूस ने मैन-पोर्टेबल 'इग्ला-एस (Igla-S)' मिसाइल भारत को दिया

हाल ही में रूस ने भारतीय थल सेना को शत्रुओं के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और जेट विमानों से निपटने के लिए नए इग्ला-एस मिसाइल सिस्टम दिए है।



इगला-एस (Igla-S) मिसाइल के बारे में

इगला-एस मैन-पोर्टेबल है यानी इसे एक आदमी भी ढो सकता है। यह कंधे से दागी जाने वाली व सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे अधिक खतरे वाले क्षेत्रों में तैनात जमीनी सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

यह वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) का एक अत्याधुनिक संस्करण है।


इगला-एस (Igla-S) की प्रमुख विशेषताएं

यह इन्फ्रारेड (IR) होमिंग तकनीक का उपयोग करती है। यह हवाई लक्ष्यों की हीट सिग्नेचर को पहचान करके उन्हें निशाना बनाती है।

मिसाइल दागे जाने के बाद, यह स्वतः टारगेट के इंजन से निकलने वाली हीट का पीछा करती है।

यह विशेषता इसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर जैसे तेज और छोटे लक्ष्यों को निशाना बनाने में कुशल बनाती है।

यह मिसाइल 6 किलोमीटर दूर तक और 3.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक के लक्ष्य को भेद सकती है।

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियोों को यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्लल्ड रजिस्टर’ मेें शामिल किय गया

हाल ही में, यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी 'मेमोरी आफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कुल 74 नई प्रविष्टियां शामिल किया है।

इनमें भारत की भगवत गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियों को भी यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।



यूनेस्को के इस रजिस्टर में अब भारत की कुल 14 प्रविष्टियां (अभिलेख) शामिल हो गई हैैं। इसमें भारत के ऋग्वेद, गिलगित पांडुलिपि, अभिनवगुप्त (940-1015 ई.) की पांडुलिपियां, मैत्रेव्याकरण (पाल काल की एक पांडुलिपि) को भी शामिल किया गया है।

वर्ष 1948 मेें पेरिस मेें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित ‘मानवाधिकारों पर सार्वभौमिक घोषणा’ भी रजिस्टर मेें शामिल की गई नई प्रविष्टियों मेें से एक है।

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र के बारे मेें

भगवद् गीता:

भगवद् गीता को गीता के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदुओं का एक धार्मिक ग्रंथ है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक है। यह ग्रंथ महाभारत में भीष्मपर्व (अध्याय 23-40) का एक हिस्सा है।

इसे कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र मेें भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद के रूप मेें संकलित किया गया है।

इसे दूसरी या पहली शताब्दी ई. पू. मेें रचित माना जाता है।

आप को बता दें कि महाभारत की रचना महर्षि वेद व्यास ने 3100-1200 ईसा पूर्व की थी।

प्रासंगिकता: इसे सार्थक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक मार्गदर्शक माना जाता है।

नाट्यशास्त्र:

इसे नाट्यवेद का सार माना जाता है। नाट्यशास्त्र निष्पादन कलाओं की एक मौखिक परंपरा है, जिसमेें 36,000 छंद शामिल
हैैं। इसे गंधर्ववेद के नाम से भी जाना जाता है।



यह नाटक (नाट्य), निष्पादन (अभिनय), सौंदर्य भावना (रस), भावना (भाव) और संगीत (संगीत) से संबंधित है

ऐसा माना जाता है कि इसे भरतमुनि ने संस्कृत मेें दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास संहिताबद्ध किया था।

इसने भारतीय काव्यशास्त्र, रंगमंच, नत्यृ और सौंदर्यशास्त्र की नीवं रखी।


यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड प्रोग्राम

यूनेस्को ने इसे 1992 मेें शुरू किया था। इसका उद्देश्य विश्व की मूल्यवान दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करना और उसे सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाना है।

यह मानव सभ्यता को प्रभावित करने वाली दस्तावेजी विरासत को मान्यता देता है।

इसका उद्देश्य ऐतिहासिक ग्रंथों, पांडुलिपियों और अभिलेखागार को संरक्षित करना तथा उन तक पहुुंच को बढ़़ावा देना है।

Elon Musk की कंपनी X ने आई.टी. अधिनियम के उल्लंघन को लेकर भारत सरकार पर मुकदमा दायर किया

हाल ही में Elon Musk की सोशल मीडिया कंपनी X ने आई.टी. अधिनियम के उल्लंघन को लेकर केंद्र सरकार पर मुकदमा दायर किया है। कंपनी ने सोशल मीडिया पर कंटेंट को विनियमित करने और हटाने का आदेश देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आई.टी. अधिनियम की धारा 79 (3) (b) के उपयोग को चुनौती दी है। कंपनी ने तर्क दिया है कि सरकार द्वारा इस प्रावधान का "दुरुपयोग" आई.टी. अधिनियम के अन्य प्रावधानों जैसे धारा 69A के तहत उपलब्ध सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देता है।


        दरअसल, ये मामला पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया X पर Grok AI से पूछे गए प्रश्नों और उनके मिले उत्तरों पर मचे बवाल से उठा है। सरकार के दबाव में अधिकारियों ने X के अधिकारियों से विवादित कंटेंट को हटाने को कहा था। आप लोगों को बता दें कि Grok, X का AI चैटबॉट है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आई.टी. अधिनियम) की धाराओं 79, 79(3) (b) व 69A के बारे में

  • धारा 79: यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एवं ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं जैसे मध्यवर्तियों को "सेफ हार्बर (safe harbour)" संरक्षण प्रदान करती है। यह धारा उन्हें उनके प्लेटफॉर्म्स पर होस्ट की गई उपयोगकर्ता-जनित कंटेंट के लिए उत्तरदायित्व से बचाती है।
  • धारा 79 (3) (b): यदि कोई मध्यवर्ती सरकारी अधिसूचना पर गैर-कानूनी कंटेंट को ब्लॉक करने / हटाने में विफल रहता है तो "सेफ हार्बर" संरक्षण को हटा दिया जाता है।
  • धारा 69A: यह सरकार को केवल संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में दिए गए आधार पर ही कंटेंट को ब्लॉक करने के आदेश जारी करने की अनुमति देती है। यह अनुच्छेद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 'उचित प्रतिबंध' लगाता है।
  • श्रेया सिंघल मामले, 2015 में दिया गया निर्णयः कंटेंट को केवल धारा 69A के तहत प्रदान की गई प्रक्रियाओं या अदालत के आदेश के माध्यम से ही सेंसर किया जा सकता है।

2023 में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी निर्देशः

  • इसने सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों और पुलिस को निर्देश जारी किया था कि धारा 79 (3) (b) के तहत सूचनाओं को ब्लॉक करने संबंधी आदेश जारी किए जा सकते हैं। 2024 में, MeitY ने एक 'सहयोग' पोर्टल लॉन्च किया था। इस पर उपर्युक्त प्राधिकारी सूचनाओं को ब्लॉक करने संबंधी आदेश जारी और अपलोड कर सकते हैं।

X द्वारा उठाए गए मुद्दे

  • धारा 79 (3) (b) का दुरुपयोगः यह सरकार को प्रत्यक्ष रूप से सूचनाओं को ब्लॉक करने की शक्तियां नहीं देती है, बल्कि केवल उन परिस्थितियों का उल्लेख करती है, जिनके तहत मध्यवर्ती अपने "सेफ हार्बर" संरक्षण से वंचित हो सकता है।
  • श्रेया सिंघल निर्णय का उल्लंघनः MeitY के निर्देश धारा 69A का पालन करने की बजाय कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए धारा 79 (3) (b) को उपकरण मानकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हैं।

माउंट टर्नकी (Mount Taranaki) ज्वालामुखी को मिला जीवन का अधिकार

हाल ही में, न्यूजीलैंड में माउंट टर्नकी को न्यूजीलैंड में 'लीगल पर्सन' के रूप में मान्यता दी गई है। माउंट टर्नकी एक स्ट्रैटोवोलकैनो है।

स्ट्रैटोवोलकैनो को मिश्रित ज्वालामुखी भी कहते है। यह अधिक ऊंचा, खड़ा और शंक्वाकार ज्वालामुखी है। इसमें चिपचिपे मैग्मा और अवरुद्ध गैसों के बाहर निकलने से विध्वंसक उद्गार होता है।



माउंट टर्नकी के बारे में

माउंट टर्नकी को ब्रिटिश कैप्टन जेम्स कुक ने माउंट एग्मोंट नाम दिया था। हालांकि, अब इसे माओरी देशज लोगों को सम्मान देने के लिए टर्नकी मौंगा (Taranaki Maunga) नाम दिया गया है।

यह न्यूजीलैंड के एग्मोंट नेशनल पार्क में स्थित है।

माओरी देशज लोग इसे अपना पूर्वज मानते हैं। इसलिए, उनके लिए यह पवित्र पर्वत है।

माओरी आओटेरोआ / न्यूजीलैंड की स्थानिक एबोरिजिनल (मूलवासी) आदिवासी और देशज नृजाति हैं।

इससे पहले न्यूजीलैंड ने 2014 में ते उरेवेरा फॉरेस्ट (Te Urewera Forest) को "लीगल पर्सनहुड" का दर्जा प्रदान किया था। इस तरह किसी प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को "जीवन का अधिकार" (Living rights) देने वाला न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश है।

न्यूजीलैंड के बारे में

  • यह दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है।
  • राजधानी - वेलिंग्टन
  • मुद्रा - न्यूजीलैंड डॉलर
  • महाद्वीप - ओशिनिया

अर्मेनिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 104वाँ सदस्य बन गया है

अर्मेनिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 104वाँ पूर्ण सदस्य बन गया है। 



अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन एक वैश्विक अंतर-सरकारी संगठन है जो कार्बन-तटस्थ भविष्य के लिए सौर ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत और फ्रांस के बीच एक सहयोगात्मक पहल है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा समाधानों को लागू करके जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को एकजुट करना है। 

इसकी संकल्पना 2015 में पेरिस में COP21 के दौरान की गई थी। इसकी शुरुआत सबसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में उष्णकटिबंधीय देशों (जो कर्क और मकर रेखा के बीच में है) के लिए किया था। उन्होंने इन देशों को 'सूर्यपुत्र' (सूर्य के पुत्र) कहा था।

इसका क्षेत्र नवीकरणीय ऊर्जा में काम करना और जलवायु परिवर्तन से निपटना है। इसका मुख्यालय राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान, गुरुग्राम, हरियाणा में है।

इसने सौर ऊर्जा को बढ़ाने में प्रौद्योगिकी, वित्त और क्षमता से संबंधित बाधाओं को सामूहिक रूप से दूर करने के लिए कई देशों को एक साथ लाया है। इसका मिशन 2030 तक सौर निवेश में एक ट्रिलियन डॉलर को अपनाना है, साथ ही प्रौद्योगिकी और वित्तपोषण लागत को कम करना है। 

भारत दुनिया को अक्षय ऊर्जा समाधान प्रदान करके टिकाऊ ऊर्जा भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत

हाल ही में, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और उनके विदेश मंत्री की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस दुर्घटना में राष्ट्रपति समेत कुल 9 लोगों की मौत हुई है।



यह घटना तब घटी जब रविवार को अज़रबैजान में किज कलासी और खोदाफरिन बांध का उद्घाटन करके तबरेज (पूर्वी अज़रबैजान प्रांत की राजधानी) लौट रहे थे। हालांकि उनके मौत की पुष्टि सोमवार को मलबा मिलने के बाद हुई।

बताया जाता है कि जहां पर हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था वहां मौसम काफी खराब था।


साजिश की आशंका

हालाँकि ईरानी सोशल मीडिया पर हेलीकॉप्टर क्रैश के पीछे साजिश होने की आशंका जताई जा रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह कैसे संभव है कि काफिले के दो हेलीकॉप्टर सुरक्षित पहुंच गए जबकि केवल रईसी का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ है। 

अमेरिका के एक सीनेटर का कहना है कि मेरी अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत हुई है, लेकिन उनके अनुसार साजिश के किसी सबूत की जानकारी नहीं है।


ईरान का खराब एविएशन सुरक्षा

अभी तक हेलीकॉप्टर क्रैश होने की वजह के बारे में पता नहीं चला है। लेकिन ईरान का एयर ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा का रिकॉर्ड काफी खराब है। इसकी एक वजह कई दशकों से लगाए जा रहे अमेरिकी प्रतिबंधों को माना जा रहा है। इन प्रतिबंधों के कारण ईरान का एविएशन सेक्टर कमजोर हुआ है।

आपको बता दें कि रईसी 'बेल 212' हेलीकॉप्टर पर सवार थे जो अमेरिका में बना था।

अतीत में ईरान के कई बड़े मंत्रियों और अधिकारियों की मौत प्लेन या हेलीकाप्टर दुर्घटना से हुई है। इसमें शामिल है- रक्षा और यातायात मंत्री, थल और वायु सेना के कमांडर।


क्या सच में अगला विश्वयुद्ध जल के मुद्दे पर होंगे?

हाल ही, में संयुक्त राष्ट्र ने 'विश्व जल विकास रिपोर्ट, 2024' जारी की है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, "इस बात का कोई निर्णायक सबूत नहीं है कि अगला युद्ध जल के मुद्दे पर होंगे।"

इस वर्ष की रिपोर्ट 'समृद्धि और शांति के लिए जल' विषय पर केंद्रित है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति

  • कृषि क्षेत्रक लगभग 70% ताजे जल की खपत के लिए जिम्मेदार है। पिछले 60 वर्षों में चाड झील 90% तक सिकुड़ गई है। हालांकि, साझा सतही जल पर सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन भूजल संसाधन संरक्षण की अभी भी गंभीर उपेक्षा की जा रही है।


2030 तक "सभी के लिए जल" से संबंधित सतत विकास लक्ष्य (SDG)-6 हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। दुनिया की 50% आबादी साल के किसी न किसी समय गंभीर जल संकट का सामना करती है। उत्तर-पश्चिम भारत और उत्तरी चीन खाद्य उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता से संबंधित जोखिमों के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन हॉटस्पॉट्स में शामिल हैं।

जल और समृद्धि के बीच विरोधाभास के मौजूद होने से सभी के लिए जल उपलब्ध करा पाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हम सभी जानते हैं कि विकसित जल संसाधन अवसंरचना से संवृद्धि और समृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, ऐसी अवसंरचना केवल सबसे अमीर देश ही वहन कर सकते हैं।

रिपोर्ट में की गई मुख्य सिफारिशेंः 

जल संसाधनों का संधारणीय प्रबंधन निम्नलिखित उपायों द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है:

  • सीमा-पार जल समझौते किए जाने चाहिए।
  • जल अवसंरचना में निजी निवेश बढ़ाया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार जल तक सार्वभौमिक पहुंच के लिए 2030 तक लगभग 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वार्षिक निवेश की आवश्यकता होगी।
  • उद्योगों में वस्तु उत्पादन को जल संसाधन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, टाटा केमिकल्स ने पुनर्चक्रण और बेहतर जल प्रबंधन के माध्यम से एक वर्ष के भीतर भूजल के उपयोग में 99.4% की कटौती की।

जल का "शांति और समृद्धि" से संबंध

जल और शांतिः 

जल संकट के निम्नलिखित दुष्परिणाम हो सकते हैं-

  • स्थानीय विवादों में वृद्धि जैसा कि अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में देखा जा रहा है।
  • अधिक प्रवासन से बसाहट वाले क्षेत्रों में तनाव बढ़ सकता है।
  • खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है।

जल और समृद्धिः

  • जल पर्यावरण को प्राकृतिक रूप में बनाए रखने में मदद करता है।
  • निम्न और निम्न मध्यम आय वाले देशों में लगभग 70-80% रोजगार जल पर निर्भर हैं।
  • पानी समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है। लड़कियां और महिलाएं जल संकट का सामना सबसे पहले करती हैं, क्योंकि यह उनकी शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और सुरक्षा को प्रभावित करता है।

दुनिया भर में मोटापे (Obesity) की समस्या में बढ़ोतरी - लैंसेट रिपोर्ट

लैंसेट के एक नए अध्ययन से पता चला है कि दुनिया भर में मोटापे की समस्या में बढ़ोतरी हुई है।



शरीर में वसा के अत्यधिक जमाव को मोटापे के रूप में परिभाषित किया गया है। अत्यधिक मोटापा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

30 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स (BMI) को मोटापा माना जाता है।

लैंसेट अध्ययन के मुख्य बिन्दुओं पर एक नजर:

दुनिया भर में बच्चों और वयस्कों में मोटापे की दर 1990 से 2022 के बीच लगभग चार गुना (एक बिलियन से अधिक) बढ़ी है।

भारत में 20 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग 44 मिलियन महिलाएं और 26 मिलियन पुरुष मोटापे की समस्या से जूझ रही/ रहे हैं।

मोटापे का प्रभावः 

हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, सांस लेने में समस्या आदि।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)" की स्थापना को मंजूरी दी

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने "इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)" की स्थापना को मंजूरी दी है। IBCA का मुख्यालय भारत में स्थापित होगा।



IBCA के बारे में

 IBCA को प्रोजेक्ट टाइगर की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में अप्रैल 2023 में लॉन्च किया गया था।

IBCA का लक्ष्य सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके पर्यावास की सुरक्षा व संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करना है। ये सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियां हैं- बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, प्यूमा, जगुआर और चीता ।

प्यूमा और जगुआर को छोड़कर, भारत में सभी 5 बड़ी बिल्ली प्रजातियां पाई जाती हैं।

बहु-देशीय व बहु-एजेंसी गठबंधन:

IBCA को उन 96 देशों के सहयोग से शुरू किया गया है, जहां पर ये बड़ी बिल्ली प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके भागीदारों में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • बड़ी बिल्ली प्रजातियों वाले देश;
  • ऐसे देश जहां बड़ी बिल्ली प्रजातियां नहीं पाई जाती हैं, लेकिन वे इनके संरक्षण में रूचि रखते हैं;
  • संरक्षण भागीदार;
  • संरक्षण में रूचि रखने वाले व्यवसायिक व कॉर्पोरेट समूह तथा
  • बड़ी बिल्ली प्रजाति के संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले वैज्ञानिक संगठन।


IBCA का वित्त-पोषणः

भारत पांच वर्षों (2023-24 से 2027-28) के लिए 150 करोड़ रुपये की प्रारंभिक सहायता प्रदान कर रहा है। द्विपक्षीय व बहुपक्षीय एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों सहित अन्यों से भी योगदान प्राप्त किया जाएगा।

गवर्नेस संरचना: 

इसमें शामिल हैं-

  • सदस्यों की सभा,
  • स्थायी समिति, और
  • सचिवालय

बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके पर्यावासों के संरक्षण का महत्त्व

पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करनाः बड़ी बिल्लियों की प्रजातियां पारिस्थितिकी तंत्र की शीर्ष परभक्षी हैं। इनकी आबादी कम होने से शिकार प्रजातियों की संख्या काफी बढ़ जाएगी। इससे अति- चराई को बढ़ावा मिलेगा और भूक्षेत्र के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।

जल सुरक्षाः हिम तेंदुओं की अधिक आबादी, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है। हिमालय कई नदियों के स्रोत हैं। ऐसे में हिम तेंदुए के संरक्षण से हिमालय और उसके हिमनद भी संरक्षित होते हैं। 

जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करनाः ये बड़ी बिल्लियों की प्रजातियां कार्बन का भंडारण करने वाले वन क्षेत्रों की रक्षा में सहायक हैं।

सांस्कृतिक प्रतीकः दुनिया भर में कई समुदायों के लिए बड़ी बिल्लियों की प्रजातियां उनकी आस्था और संस्कृति से जुड़ी हुई हैं और ये उनकी लोक कथाओं में भी शामिल रही हैं। ऐसे में इन प्रजातियों के संरक्षण से देशज प्रजातियों की संस्कृतियों का भी संरक्षण होता है।

अर्थव्यवस्था का समर्थनः इनके पर्यावास आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं।

तुवालु के संसद सदस्‍यों ने आम चुनाव के बाद प्रशांत द्वीपीय राष्‍ट्र के पूर्व महान्‍यायवादी फेलेटी टीओ को नया प्रधानमंत्री चुना

हाल ही में तुवालु (Tuvalu) के सांसदों सदस्यों ने प्रशांत द्विपीय राष्ट्र के पूर्व महान्यायवादी फेलेटी टीओ को देश का नया प्रधानमंत्री चुना है। सांसदों ने उन्हें निर्विरोध चुन लिया है क्योंकि वह प्रधानमंत्री पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार के रूप में खड़े थे।



फेलेटी टेओ को तुवालु द्वीप का नया प्रधान मंत्री चुना गया है।

प्रशांत महासागर में स्थित तुवालु द्वीप के नए प्रधानमंत्री की घोषणा हो गई है। देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल फेलेटी टेओ को नए प्रधान मंत्री के रूप में चुना गया है। 

तुवालु में पिछले महीने जनवरी में चुनाव हुए थे। इन चुनावों पर ताइवान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, यूके और यहां तक ​​कि अमेरिका की भी पैनी नजर थी। हाल के दिनों में तुवालु ताइवान के साथ अपने संबंधों को लेकर चर्चा में था।

25 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश में केवल 12 हजार लोग रहते हैं। लेकिन फिर भी भूराजनीति में इस देश का विशेष महत्व है।

तुवालु दक्षिण प्रशांत महासागर में ओशिनिया के पोलिनेशिया उपक्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया और हवाई द्वीप के बीच स्थित दुनिया के सबसे छोटे द्वीपों में से एक है। इसमें तीन रीफ द्वीप और छह एटोल शामिल हैं।
  
ताइवान के साथ तुवालु के रिश्ते इसे वैश्विक राजनीति में एक विशेष दर्जा देते हैं। आइए जानते हैं कि ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस छोटे से द्वीप राज्य को अपने पक्ष में रखने के लिए इतनी कोशिश क्यों कर रहे हैं। वहीं, चीन इस द्वीप पर अपना प्रभाव क्यों बढ़ाने की कोशिश कर रहा है?

तुवालु ताइवान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

तुवालु कभी ब्रिटेन के अधीन था। इसे 1978 में आज़ादी मिली। हालाँकि, ब्रिटिश सम्राट अभी भी देश का प्रमुख है। भू-राजनीति में इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि तुवालु ताइवान को मान्यता देता है। 

तुवालु सहित दुनिया के केवल 12 देशों ने ताइवान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है, जो चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' के खिलाफ है। चीन का मानना ​​है कि ताइवान उसका अभिन्न अंग है और एक दिन उसका चीन में विलय निश्चित है।

तुवालु उन तीन प्रशांत द्वीप देशों में से एक है जो अभी भी ताइवान को मान्यता देते हैं। हाल के दिनों में ताइवान के साझेदार देशों की संख्या घटी है। पिछले महीने जब नाउरू ने ताइवान से राजनयिक संबंध तोड़े थे तो इसकी वजह नाउरू पर चीन के बढ़ते प्रभाव को बताया गया था।

चीन तुवालु को क्यों चाहता है?

चीन ताइवान को मान्यता देने वाले छोटे द्वीपों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ताइवान को जितने कम देश मान्यता देंगे, चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' उतनी ही मजबूत होगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह चीन आसानी से ताइवान पर कब्जा कर सकेगा। चीन मुख्य रूप से ताइवान के सहयोगी द्वीपों को जीतने के लिए धन का उपयोग कर रहा है। 

2019 में, किरिबाती और सोलोमन द्वीप समूह ने ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त कर दिए। उस समय ताइवान के तत्कालीन विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा था, 'चीन की डॉलर कूटनीति और बड़ी मात्रा में विदेशी सहायता के झूठे वादों के कारण सोलोमन द्वीप ने ताइवान के साथ संबंध खत्म कर दिए हैं।'

ऑस्ट्रेलिया और ताइवान तुवालु की कैसे मदद कर रहे हैं?

प्रधानमंत्री चुनाव के बाद अब चीन और ताइवान की नजर तुवालु पर है। ताइवान और तुवालु के बीच 1979 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 

ताइवान अलग-अलग तरीकों से तुवालु की मदद करता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान तुवालु को हर साल लगभग 12 मिलियन डॉलर की बजटीय सहायता प्रदान करता है। 

इसके अलावा ताइवान अपने सहयोगी देश को नई संसद भवन के लिए करीब 10 करोड़ डॉलर समेत कई परियोजनाओं के लिए पैसा देता है। ताइवान ने COVID-19 से निपटने के लिए तुवालु को चिकित्सा उपकरण भेजे।  

नवंबर में ऑस्ट्रेलिया और तुवालु के बीच एक संधि पर भी हस्ताक्षर किये गये। यह संधि ऑस्ट्रेलिया को प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य महामारी और सैन्य आक्रामकता के जवाब में तुवालु की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध करती है।

दुनिया के सबसे भारी सांप पर चौकाने वाला शोध सामने आया

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन एनाकोंडा वास्तव में आनुवंशिक रूप से दो भिन्न प्रजातियां हैं।


ग्रीन एनाकोंडा (यूनेक्टेस मुरिनस) के बारे में

यह सांप जहरीला नहीं होता है। यह बोआ फैमिली का सदस्य है।

यह दुनिया का सबसे भारी सांप है। इसका वजन 550 पाउंड से अधिक हो जाता है।

इस प्रजाति की मादाएं नर की तुलना में काफी बड़ी होती हैं। 

इस सांप की IUCN स्थिति 'लीस्ट कंसर्न' है।

पर्यावास

ये दलदली भूमि और धीमी गति से प्रवाहित होने वाली धाराओं में रहते हैं। ग्रीन एनाकोंडा मुख्य रूप से अमेज़न और ओरिनोको बेसिन के उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में पाया जाता है।

जीवनकाल

इस सांप का जीवन काल वन में लगभग 10 वर्ष तक है।

दुबई ने विश्‍व की पहली हवाई टैक्सी सेवा का शुभारंभ करने के लिए वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट-2024 में समझौतों पर हस्ताक्षर किए

दुबई (UAE) ने विश्‍व की पहली हवाई टैक्‍सी सेवा का शुभारंभ करने के लिए वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट-2024 में समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए हैं। 




शहरी परिवहन में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए यह महत्वपूर्ण पहल की गई है। ये समझौते शहर में इलेक्ट्रिक हवाई टैक्‍सी सेवा और वर्टिपोर्ट नेटवर्क का विस्‍तार करने में दुबई के लिए सहायक होंगे।
  
इस पहल का मुख्‍य आकर्षण जॉबी एविएशन एस-4 एक नवाचारी विमान है, जिसमें एक पायलट सहित चार यात्री आराम से उड़ान भर सकेंगे। एस-4 नवाचारी विमान 6 प्रॉपेलर और 4 बैटरियों से संचालित होगा। 

इस विमान की अधिकतम रेंज 161 किलोमीटर है। इस विमान की प्रति घंटे की गति 321 किलोमीटर है। इस विमान की वर्टिकल टेक ऑफ और लैंडिंग क्षमता इसे शहरी ढांचे के लिए आदर्श बनाती है।

इस नवाचारी विमान की उड़ान के लिए कम स्‍थान की आवश्‍यकता होगी और हेलिकॉप्‍टर की तुलना में ध्‍वनि प्रदूषण भी कम होगा।

बिजली संचालित इस विमान को उड़ानों के बीच तेजी से रीचार्ज किया जा सकता है। यह पहल अधिक सतत और सुगम परिवहन भविष्‍य की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम को दर्शाती है।
  
एयर टैक्सी नेटवर्क अपना परिचालन 2026 से शुरु करेगा। 

यह कदम शहरी परिवहन व्यवस्था को पुन: परिभाषित करने संबंधी दुबई की तलाश में एक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर होगा। 

अबू धाबी में बना पहला हिंदू मंदिर, 14 फरवरी को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन 

संयुक्त राष्ट्र अमीरात (UAE) की राजधानी अबूधाबी का पहला हिंदू मंदिर पूरी तरह से बनकर तैयार है। इस मंदिर में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 14 फरवरी को पूरा होगा। उसी दिन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (बीएपीएस) संस्था के प्रमुख संत स्वामी महाराज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर का उद्घाटन करेंगे।



गौरतलब हो,  रेगिस्तान में मंदिर निर्माण की कल्पना 27 वर्ष पूर्व बीएपीएस संस्था के प्रमुख संत स्वामी महाराज ने की थी। नई दिल्ली के अक्षरधाम स्थित बीएपीएस रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहायक निदेशक साधु ज्ञानानंद स्वामी ने बताया कि वैसे तो संस्था ने विश्व के कई देशों में 1100 से अधिक मंदिर बनवाए हैं लेकिन अरब मुस्लिम देश में हिंदू मंदिर का निर्माण अपने में ऐतिहासिक है। 

यूएई में कहां स्थित है मंदिर ? 

अबू मुरीखाह जिले में स्थित 'अल वाकबा' में यह मंदिर भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दोस्ती, सांस्कृतिक सद्भाव और सहयोग की भावना का प्रतीक है। यहां मंदिर का निर्माण यूएई सरकार और उसके शासकों की उदारता से ही संभव हो सका है। 

दो देशों की संस्कृतियों का प्रतीक

साधु ज्ञानानंद स्वामी ने बताया कि अबूधाबी में दो देशों की संस्कृतियों के प्रतीक के रूप में मंदिर निर्माण के लिए बीएपीएस संस्था के लगातार प्रयास के बाद क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने वर्ष 2015 में मंदिर के लिए जमीन देने की घोषणा की थी। 



2018 में पीएम मोदी ने मंदिर प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 फरवरी 2018 को यूएई में भारतीय समुदाय को संबोधन के दौरान इस मंदिर के प्रोजेक्ट को शुरू करने की घोषणा की थी। बीस अप्रैल 2019 को इस मंदिर का शिलान्यास किया गया था। मंदिर के निर्माण के लिए भारत से सैकड़ों टन नक्काशीदार पत्थर 09 अगस्त 2021 को भेजे गए थे।

27 एकड़ भूमि पर मंदिर परिसर का हुआ निर्माण

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में पहले शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मंदिर निर्माण के लिए 13.5 एकड़ जमीन दी थी लेकिन वर्ष 2019 में अबू धाबी के 'सहिष्णुता वर्ष' मनाने के अवसर पर मंदिर के लिए 13.5 एकड़ भूमि और आवंटित कर दी। इस प्रकार 27 एकड़ भूमि पर मंदिर परिसर का निर्माण हुआ है। 



यह पश्चिम एशिया के पत्थरों से बना सबसे बड़ा मंदिर होगा

उन्होंने बताया कि यह मंदिर पश्चिम एशिया के पत्थरों से बना सबसे बड़ा मंदिर होगा। इस मंदिर के सात शिखर अरब के सात अमीरातों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में लगे पत्थर राजस्थान से भेजे गए हैं और भीषण गर्मी में भी शीतलता प्रदान करेंगे। इस मंदिर की लंबाई 262 फीट, चौड़ाई 180 फीट और ऊंचाई 108 फीट है। मंदिर में 410 स्तंभ, 12 पिरामिडल शिखर, दो गुंबद होंगे। इस पर 7 तीव्रता तक के भूकंप का कोई असर नहीं होगा।

14 फरवरी को सरस्वती पूजन के दिन पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

उन्होंने बताया कि 14 फरवरी को सरस्वती पूजन के दिन बीएपीएस के प्रमुख संत स्वामी महाराज के साथ प्रधानमंत्री मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए महंत स्वामी महाराज भी मंगलवार को अबू धाबी पहुंचे। 

कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख लोग कार्यक्रम में होंगे शामिल

यूएई सरकार ने उनको राज्य अतिथि का दर्जा दिया है और एयरपोर्ट पर स्वामी का शेख नाहयान मुबारक अल नाहयान ने स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के अलावा कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उद्घाटन के बाद मंदिर में 15 से 21 फरवरी एक सप्ताह तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


कैटालोनिया (Catalonia) ने अपने इतिहास के अब तक के भीषण सूखे के चलते आपातकाल की घोषणा की है

कैटालोनिया (Catalonia) स्पेन का एक स्वास्थ्य क्षेत्र है। इसकी राजधानी बार्सिलोना (Barcelona) है।



यह आइबेरिया प्रायद्वी के उत्तर-पूर्व में अवस्थित है। इसकी सीमा उत्तर में फ्रांस और एंडोरा तथा पूर्व में भूमध्य सागर के साथ लगती है।

पिरेनीज पर्वत श्रृंखला कैटालोनिया को फ्रांस से अलग करती है। कैटालोनिया में भूमध्यसागरी प्रकार की जलवायु पाई जाती है। इस प्रकार के जलवायु में गर्मियां उष्ण और शुष्क होती है, जबकि वर्षा शीत ऋतु में होती है।

इसकी प्रमुख नदी एब्रो नदी है।


पांच देश आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स (BRICS) में शामिल हुए

हाल ही में, मिश्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ब्रिक्स में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिए गए हैं।

हालांकि अर्जेंटीना को ब्रिक्स में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि अर्जेंटीना ब्रिक्स में शामिल होने के अपने निर्णय से पीछे हट गया था।

इससे पहले ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार 2010 में किया गया था जब दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ था।

कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...