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कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

 

कर्नाटक सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए और आंध्रप्रदेश सरकार ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लागया है। इस तरह कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया हैं। 

सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों की यह घोषणा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-2027 के बजट भाषण में की है, जबकि आंध्रप्रदेश के मुखेमन्त्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा की इस नियम को लागू करने के लिए लगभग 90 दिनों में व्यवस्था बनाई जाएगी। 

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में 15-24 आयु वर्ग के लोगों में अत्यधिक स्क्रीन उपयोग और बिगड़ती मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को उजागर किया है। इसमें चिंता, नींद संबंधी विकार और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी सबसे प्रमुख लक्षण बताया गया है। 


 प्रतिबंध के कारण

  • बच्चों में सोशल मीडिया की लत बढ़ना । 
  • साइबर बुलिङ्ग और गलत कंटेन्ट से सुरक्षा 
  • पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को कम करना। 

 कानूनी पक्ष

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार संचार और डिजिटल मध्यस्थों का विनियमन केंद्र सरकार के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आता है। यह मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश) नियम 2021 द्वारा नियंत्रित होता है।  हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और बाल कल्याण, दोनों राज्य सूची के विषय है। इसीलिए कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि इससे संवैधानिक उपयुक्तता और विधायी क्षमता के प्रश्न उठ सकते हैं।


 सोशल मीडिया पर वैश्विक प्रतिबंध

 अब तक कई देशों ने सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु संबंधी प्रतिबंध लगा चूके है। इसमें सबसे पहले नंबर पर हैं आस्ट्रेलिया। आस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया दिया है। 

 इसके बाद फ्रांस, स्पेन, इंडोनेशिया, नेपाल आदि देशों ने भी सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है।  


 प्रतिबंध के खिलाफ़ आलोचकों का पक्ष

 सरकारों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंधों को लेकर कई आलोचक विरोध कर रहे है। इस विरोध के निम्नलिखित कारण है:

  •  इंटरनेट उपयोग की स्वतंत्रता:  कई आलोचक मानते हैं कि इंटरनेट उपयोग की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना डिजिटल उनके अधिकारों का हनन है। 

  •  डिजिटल साक्षरता और योग्यता:  क्राई आलोचकों का कहना है कि इस प्रतिबंध से बच्चों में डिजिटल साक्षरता और योग्यता से वंचित हो जाएंगे। 

  •  लैंगिक असमानता:  भारत में केवल 33.3% महिलाओं ने ही इंटरनेट का उपयोग किया जबकि पुरुषों का प्रतिशत 57.1% है।  बाल संरक्षण के नाम पर प्रतिबंध से माता-पिता अपने बेटियों के लिए डिवाइस के उपयोग में असमानता बढ़ा सकते। 

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: डिजिटल अभिव्यक्ति को सीमित कर सकता है।



निष्कर्ष 

सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध अतार्किक है। डिजिटल हो रही दुनिया में बच्चों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना देश के विकास में अहम योगदान दे सकता है। हालांकि इसके अविनियमित उपयोग से हो रहे दुष्प्रभाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सोशल मीडिया का विनियमित उपयोग अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसमें अभिभावक, शिक्षक, समाज, सरकार और उद्योग जगत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसमें लाभ को बढ़ाने और हानिकारक प्रभावों को कम करने पर विचार किया जा सकता है।


पहलगाम आतंकी हमला और भारत के प्रधानमंत्री मोदी की बिहार की रैली में दिए गए चेतावनी से उपजे सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिला

हाल ही में, भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में एक बहस के दौरान बताया कि भारतीय सेना के एक संयुक्त अभियान (ऑपरेशन महादेव) में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है।  ये आतंकवादी पहलगाम  आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने इसे भारत की "सख्त आतंकवाद नीति" का उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुरक्षा बलों को बधाई दी और कहा कि इस आपरेशन से आतंकवादियों को उनके अपराध की "सही सजा" मिली है। 



ऑपरेशन महादेव के बारे में

यह ऑपरेशन भारतीय सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने चलाया था। यह ऑपरेशन 27-28 जुलाई, 2025 को चलाया गया था। इसका उद्देश्य पहलगाम हत्याकांड के जिम्मेदार आतंकवादियों को पकड़ना या मार गिराना था। 

अमित शाह ने संसद को बताया कि मारे गए तीनों आतंकवादियों में से एक हाशिम मूसा (उर्फ सुलेमान शाह) पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था। यह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। उन्होंने दो अन्य आतंकवादियों के कोडनेम भी बताएं- "अफगान" और "जिब्रान"

मारे गए यह आतंकी श्रीनगर जिले के हरवन-हिदवास क्षेत्र में छिपे हुए थे। यह क्षेत्र श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में पड़ता है। यह एक घना और दुर्गम जंगल वाला इलाका है, जो आतंकवादियों को छिपने और बचने के लिए आदर्श माना जाता है। सुरक्षा बलों को सुराग मिला था कि पहलगाम हमले के आरोपी आतंकी इसी इलाके में छिपे हुए हैं।

आतंकियों की पहचान

अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में मारे गए इन आतंकियों का संबंध पहलगाम हमले से था जैसा कि सरकार ने  दावा किया है। इस सवाल को विपक्ष ने भी उठाया है। सरकार ने इन आतंकवादियों का संबंध पहलगाम हत्याकांड से होने का निम्नलिखित सबूत संसद में पेश किया है:

  • स्थानीय लोगों और गिरफ्तार किए गए संदिग्धों ने इन आतंकवादियों की पहचान की है।
  • पाकिस्तानी वोटर आईडी कार्ड 
  • पाकिस्तानी चॉकलेट और सामान 
  • हथियार, जिनकी फॉरेंसिक जांच से पुष्टि हुई है कि यही हथियार पहलगाम हत्याकांड में इस्तेमाल हुए थे।
सरकार के यह सबूत कितने सही हैं और कितने गलत है, यह कह पाना बहुत मुश्किल है। चुकी सरकार ने यह सबूत संसद में पेश किए हैं इसलिए इसे सत्य मानकर चलना ही उचित होगा।


पहलगम आतंकी हमला 

यह हमला 22 अप्रैल, 2025 को किया गया था। इस हमले में 5 आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित और Lashkar-e-Taiba से संबंधित आतंकवादी समूह The Resistance Front (TRF) ने ली थी। हालांकि बाद में उसने अपना दावा वापस ले लिया था। 

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की अपनी एक रैली में कहा था कि "जिन्होंने यह हमला किया है उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी।" तो सवाल यह है कि क्या उनको यह सजा मिली? इस सवाल का उत्तर जानने से पहले हम यह जानते है कि आखिरकार ये साजिशकर्ता है कौन?

पहलगाम हमले के मुख्य साजिशकर्ता कौन?

प्रधानमंत्री ने बिहार की रैली में दो तरह के लोगों की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया- पहला, इस हमले को अंजाम देने वाले लोग; और दूसरा, इसके साजिशकर्ता।
  • पहला, पहलगम हमले को अंजाम देने वाले लोग: इस हमले को पाँच आतंकियों ने अंजाम दिया था। इसमें से एक आतंकवादी को जिसे पहलगाम हत्याकांड का मास्टरमाइंड कहा जा रहा था, को मार गिराया गया। 
  • दूसरा, साजिशकर्ता: पहलगाम हमले के साजिशकर्ताओं की जानकारी पकड़े गए संदिग्धों के बयानों, ड्रोन फूटेजों, आतंकवादियों से प्राप्त सबूतों और बयानों,  विशेषज्ञों की रिपोर्टों, और आम लोगों की राय से पता चलता है। ये सभी संकेत पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों, ISI और पाकिस्तानी आर्मी चीफ की तरफ जाते है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और मीडिया ने भी इशारा किया कि ISI और पाकिस्तानी सेना की सहमति या चुपचाप समर्थन के बिना इतनी बड़ी घुसपैठ और हमला संभव नहीं था। भारत ने इस हमले को राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद (State-sponsored cross-border terrorism) कहा। 

क्या पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और साजिशकर्ताओं को कड़ी सजा मिली?

भारत ने पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों और सजिशकर्ताओं को कड़ी सजा देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर और महादेव चलाया। इसके अलावा अंतर्रास्ट्रीय प्रयास भी किए। कई देशों ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की। अमेरिका ने TRF को आतंकवादी संगठन घोषित किया। UN Secrity Council ने भी अपनी रिपोर्ट में TRF का नाम शामिल किया। भारत के प्रयासों के बावजूद भी FATF ने पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा तो की लेकिन उसे ग्रे या ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया। FATF ने कहा  "This, and other recent attacks, could not occur without money and the means to move funds between terrorist supporters." यानी, ऐसे हमले आतंकवादी फंडिंग और वित्तीय लेन-देन की मौजूदगी के बिना संभव ही नहीं होते हैं। यही नहीं, IMF ने भी पाकिस्तान को करीब $1 अरब का तत्काल भुगतान जारी कर दिया और नए $1.4 अरब RSF फंड को मंजूरी दे दी

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)

यह भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) के जवाब में पाकिस्तान और PoK में किए गए सटीक सैन अभियान का नाम है। यह मिशन 7 मई 2025 की रात 1:05 बजे से 1:30 बजे तक चला, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर 9 आतंकवादी ठिकानों पर सटीक वार किए। इन ठिकानों में Jaish-e-Mohammed, Lashkar-e-Taiba और Hizbul Mujahideen के रिक्रूटमेंट, प्रशिक्षण और कमांड सेंटर शामिल थे। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य आधार या नागरिक इलाके को निशाना नहीं बनाया गया। केवल आतंकवादी संरचना को निशाना बनाया गया था। भारतीय सूत्रों के अनुसार, लगभग 70 आतंकवादी मारे गए और 60 घायल हुए; जबकि पाकिस्तान ने 8–9 नागरिकों की मौत होने की जानकारी दी। इस ऑपरेशन में पाक सेना की संचार प्रणाली और साइबर कमांड को ध्वस्त कर दिया गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत ने इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी सिक्योरिटी और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया। 

ऑपरेशन महादेव (Operation Mahadev)

ऊपर हम पढ़ चुके है कि ऑपरेशन महादेव के तहत तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया। इसमें से एक को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया। 

क्या भारत पहलगाम हमले का बदल ले लिया है?

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत ने पाकिस्तान को और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को मुहतोड़ जवाब दिया है। लेकिन अभी तक भारत ने पहलगाम हमले के जिम्मेदार 1-3 आतंकियों को ही मार है। अभी भी कम-से-कम दो आतंकी बाकी है। साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर में कितने आतंकी और साजिशकर्ता मारे गए, इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 

वास्तव में, अगर देखा जाय तो पहलगाम हमले का असली साजिशकर्ता हमले को अंजाम देने वाले आतंकी नहीं, बल्कि पाकिस्तानी आर्मी और ISI है, जिन्होंने आतंकियों को सहायता, सुविधा, प्रशिक्षण और हथियार दिए है। भारत के प्रधानमंत्री ने बिहार की रैली में कहा था कि साजिशकर्ताओं को भी उनकी कल्पना से कड़ी सजा मिलेगी। तो अब सवाल यह है कि क्या उन्हें यह सजा मिली? इसका उत्तर है- नहीं; क्योंकि न तो अभी तक ISI प्रमुख मारा गया और न ही पाकिस्तान आर्मी चीफ (General Asim Munir)। पाकिस्तान ने सेना और लोगों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने के लिए आसिम मुनिर को पाकिस्तानी आर्मी का सर्वोच्च पद "Field Marshal" के रूप में प्रमोशन दे दिया। यही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशिफ मुनीर को व्हाइट हाउस में बुलाकर न सिर्फ उसके साथ लंच किया बल्कि ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने में उसकी भूमिका की प्रशंसा भी की। इसके अलावा अमेरिका ने पाकिस्तान के तेल भंडारों की खोज और विकास में निवेश करने की घोषणा की है। अमेरिका ने भारत पर कुल 35% का टैरिफ लगाया है, वहीं पाकिस्तान पर 20% का टैरिफ लगाया है। यह अमेरिका की भारत के साथ दोहरे व्यवहार को दर्शाता है। यानी अमेरिका चीन और रूस को साधने के लिए भारत का इस्तेमाल करता है, जबकि भारत को साधने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बोलता है लेकिन पाकिस्तान के जरिए अप्रत्यक्ष और चुपके से आतंकवाद को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता है। चीन पर भी यही बात लागू होता है। चीन ने तो इस तनाव में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है।

निष्कर्ष 

उपर्युक्त बातों से एक बात तो समझ में आ गई है कि भारत को कम-से-कम तीन मोर्चों पर युद्ध के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। पहला पाकिस्तान, दूसरा चीन और तीसरा संभावित अन्य देश। हमने 1971 के युद्ध में तीसरे देश के रूप में भारत के खिलाफ अमेरिका की भूमिका को देख चुके है। यह भी हो सकता है कि भविष्य में तीसरे देश के रूप में हमारा कोई पड़ोसी देश हो। इसके अलावा भारत को अपनी खुफिया एजेंसियों को और मजबूत बनाने, भविष्य की नई रक्षा तकनीकों को अपनाने, पर्याप्त रक्षा सामग्रियों और ढ़ाचों का विकास करने और सैनिकों के भविषोंमुख प्रशिक्षण आदि पर ध्यान देना चाहिए। आर्थिक स्थिति भी युद्ध में बड़ी भूमिका निभाती है, तो इस पर भी ध्यान देना चाहिए। भारत को युद्ध या तनाव के हालातों में अपनी अंतर्रास्ट्रीय  कूटनीति को और मजबूत बनाने की जरूरत हैं ताकि अन्य देश उसके साथ खड़े रहे। 

ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को मिली अब तक की सबसे बड़ी सफलता

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम कर रही बेंगलुरू की एक शोध टीम ने तेजी से चार्ज होने वाली और लंबे समय तक चलने वाली एक सोडियम-आयन बैटरी (SIB) विकसित की है। यह केवल 6 मिनट में 80% तक चार्ज हो सकती है और 3000 से अधिक चार्ज साइकिल तक चल सकती है।

बाईं तरफ फास्ट चार्जिंग बैटरी है जबकि दाहिने तरफ इससे शोधकर्ता  


यह भारत की सबसे बड़ी सफलता क्यों

पारंपरिक SIB बैटरियों की तुलना में यह अधिक तेज चार्जिंग और लंबे समय तक चलती हैं। ऊर्जा की बढ़ती मांगों के बीच यह किफायती, तेज और सुरक्षित बैटरी हैं। हालांकि लिथियम आयन बैटरी अब तक इस मांग को पूरा करती आ रही हैं, लेकिन इसकी कम उपलब्धता और अधिक लागत इसके उपयोग को महंगी बनाती हैं। 

भारत में सोडियम किफायती और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जबकि लिथियम दुर्लभ है और व्यापक रूप से इसका आयात किया जाता है। लीथियम के बजाय सोडियम के माध्यम से बनी बैटरी देश को ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकती है, जो भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन का एक प्रमुख लक्ष्य है। 

सोडियम आयन बैटरियां सभी को ऊर्जा प्रदान कर सकती है जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ग्रिडों, ड्रोनों और ग्रामीण घरों तक।

सोडियम-आयन बैटरी (SIB) के बारे में

परिभाषाः यह एक प्रकार की रिचार्जेबल बैटरी है, जो लिथियम बैटरी की तरह काम करती है। हालांकि, इसमें लिथियम आयनों (Li+) की बजाय सोडियम आयनों (Na+) का उपयोग किया जाता है।

सोडियम-आयन बैटरी (SIB) कैसे काम करती है?

डिस्चार्ज के समयः सोडियम आयन एनोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) से कैथोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) की ओर जाते हैं, जहां ये आयन जमा होते हैं और रिडक्शन प्रक्रिया संपन्न होती है।

ये आयन इलेक्ट्रोलाइट (एक विद्युत कंडक्टर) के माध्यम से गमन करते हैं। ये इलेक्ट्रोलाइट विभवांतर (Potential difference) उत्पन्न करके विद्युत प्रवाह को संभव बनाते हैं।

रिचार्ज के दौरानः सोडियम आयन एनोड पर वापस लौट आते हैं।


लिथियम-आयन बैटरी (LIBs) की तुलना में सोडियम-आयन बैटरी (SIBs) के लाभः

लागतः SIBs की लागत तुलनात्मक रूप से कम होती है। सोडियम के यौगिक लिथियम से सस्ते होते हैं, जिससे बैटरी की कुल लागत 15% से 20% तक कम हो सकती है।

आपूर्ति श्रृंखला का विकेन्द्रीकरणः सोडियम धरती पर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे इसका उत्पादन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है। इससे भू-राजनीतिक जोखिम का असर कम हो जाता है।

उदाहरण के लिए - 2023 तक वैश्विक लिथियम प्रसंस्करण में चीन की लगभग 60% हिस्सेदारी थी। यह स्थिति लिथियम आपूर्ति श्रृंखलाओं में मौजूद केन्द्रीयता को उजागर करती है जिसमें SIBs विविधता लाने में मदद कर सकती है।

प्रौद्योगिकी: SIBs वस्तुतः LIBs की तुलना में ज्यादा और कम, दोनों तापमान पर काम कर सकती है। इसलिए, तापमान में अधिक भिन्नता वाले क्षेत्रों में भी इनका सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है।

सुरक्षाः SIBs का परिवहन शून्य वोल्टेज (पूरी तरह डिस्चार्ज) पर भी किया जा सकता है। इससे LIBs की तुलना में आग लगने का जोखिम कम होता है और सुरक्षा उपायों की लागत भी कम होती है।

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए

हाल ही में, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर किए।

यह एक व्यापक समझौता है, जो लगभग 3 वर्षों की लंबी वार्ता प्रक्रिया के बाद संपन्न हुआ है।


भारत-यूनाइटेड किंगडम FTA की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर

टैरिफ का उन्मूलनः भारत को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइन्स पर टैरिफ उन्मूलन से लाभ होगा, यह लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करेगा।

वर्तमान में, दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 बिलियन अमरीकी डॉलर है।

पेशेवरों के आवागमन को आसान बनानाः इसमें निवेशक, राइट टू वर्क के साथ किसी एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर होने वाला कंपनी का कर्मचारी और उसके जीवन-साथी एवं आश्रित बच्चे, इंडिपेंडेंट प्रोफेशनल्स आदि शामिल हैं।

दोहरा अंशदान अभिसमयः यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय श्रमिकों और उनके नियोक्ताओं को तीन वर्षों तक यूनाइटेड किंगडम में सामाजिक सुरक्षा अंशदान के भुगतान से छूट प्रदान की गई है।

प्रतिभाशाली और कुशल युवाओं के लिए अवसरः इससे यूनाइटेड किंगडम की डिजिटल रूप से वितरित सेवाओं एवं उन्नत डिजिटल अवसंरचना से लाभ मिलेगा।

निर्यात के अवसरः वस्त्र, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स, जैविक रसायन जैसे क्षेत्रकों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

सेवाओं का लाभः जैसे IT/ ITeS, वित्तीय सेवाएं आदि नए अवसर और रोजगार प्रदान करेंगे।

अन्यः गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना, बेहतर विनियामकीय पद्धतियों को बढ़ावा देना आदि।


मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बारे में

अर्थः यह एक ऐसा समझौता है, जो देशों या क्षेत्रीय समूहों के बीच व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करता है और व्यापार को बढ़ावा देता है।

वर्तमान में भारत के जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, सिंगापुर, ASEAN, मलेशिया आदि देशों के साथ FTAs हैं।

दायराः यह आमतौर पर वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को कवर करता है, लेकिन इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार (IP), निवेश, सरकारी खरीद और प्रतिस्पर्धा नीति जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं।

रूस ने मैन-पोर्टेबल 'इग्ला-एस (Igla-S)' मिसाइल भारत को दिया

हाल ही में रूस ने भारतीय थल सेना को शत्रुओं के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और जेट विमानों से निपटने के लिए नए इग्ला-एस मिसाइल सिस्टम दिए है।



इगला-एस (Igla-S) मिसाइल के बारे में

इगला-एस मैन-पोर्टेबल है यानी इसे एक आदमी भी ढो सकता है। यह कंधे से दागी जाने वाली व सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे अधिक खतरे वाले क्षेत्रों में तैनात जमीनी सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

यह वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) का एक अत्याधुनिक संस्करण है।


इगला-एस (Igla-S) की प्रमुख विशेषताएं

यह इन्फ्रारेड (IR) होमिंग तकनीक का उपयोग करती है। यह हवाई लक्ष्यों की हीट सिग्नेचर को पहचान करके उन्हें निशाना बनाती है।

मिसाइल दागे जाने के बाद, यह स्वतः टारगेट के इंजन से निकलने वाली हीट का पीछा करती है।

यह विशेषता इसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर जैसे तेज और छोटे लक्ष्यों को निशाना बनाने में कुशल बनाती है।

यह मिसाइल 6 किलोमीटर दूर तक और 3.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक के लक्ष्य को भेद सकती है।

इक होर अश्वथामा के लेखक को मिला साहित्य अकादमिक पुरस्कार

हाल ही में, चमन अरोड़ा को उनकी पुस्तक "इक होर अश्वथामा" के लिए डोगरी में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है।



साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 में की गई थी। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाता है। यह अकादमी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। 

पहला पुरस्कार 1955 में दिया गया था।

यह पुरस्कार अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी प्रमुख भारतीय भाषा में प्रकाशित साहित्यिक दृष्टि से सबसे उत्कृष्ट रचनाओं के लिए दिया जाता है।

अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में संविधान की अनुसूची VIII के तहत सूचीबद्ध 22 भाषाएं तथा अंग्रेजी व राजस्थानी शामिल हैं।

पुरस्कार एक मंजूषा के रूप में होता है। इसमें एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका होती है और 1,00,000/-रुपये नकद दिए जाते है।

लुधियाना गैस कांड : सीवर से निकली हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) ने ली 11 लोगों की जान

पंजाब के लुधियाना जिले में रविवार सुबह ग्यासपुरा इंडस्ट्रियल एरिया के पास सुआ रोड पर सीवर से निकली हाइड्रोजन सल्फाइड गैस से 11 लोगों की मौत हो गई। इनमें पांच महिलाएं और दो बच्चे भी शामिल हैं। गैस के कारण बेहोश हुए चार लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।



हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) के बारे में

यह एक अत्यधिक विषाक्त, रंगहीन और ज्वलनशील गैस है। इसमें सड़े हुए अंडों जैसी तेज गंध होती है। चूंकि, यह हवा से भारी होती है, इसलिए यह कम हवा वाले स्थानों के तल पर जमा हो जाती है।

यह सल्फर चक्र में एक प्रमुख भागीदार है। यह चक्र पृथ्वी पर सल्फर का जैव-भूरासायनिक चक्र है।

यह प्राकृतिक रूप से कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और गर्म जल सोतों (hot springs) में पाई जाती है।

हाइड्रोजन सल्फाइड के संपर्क में आने से आंखों और श्वसन प्रणाली में जलन हो सकती है। यह एपनिया, कोमा, आना, सिरदर्द, अनिद्रा आदि का कारण भी बन सकता है।

अमेरिका ने अपनी सीनेट के एक संकल्प में मैकमहोन रेखा को चीन और भारत के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता दी है

अमेरिका ने अपनी सीनेट के एक संकल्प में मैकमहोन रेखा को चीन और भारत के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता दी है।



आप को बता दें कि मैकमहोन रेखा पूर्वी क्षेत्र में चीन और भारत के बीच वास्तविक सीमा के रूप में कार्य करती है।

यह रेखा विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और तिब्बत के बीच, पश्चिम में भूटान से लेकर पूर्व में म्यांमार तक की सीमा को दर्शाती है।

यह भूटान के किनारे से बर्मा सीमा पर स्थित इसु रजी दरें तक विस्तारित है।

इस रेखा का निर्धारण 1914 के शिमला सम्मेलन के दौरान किया गया था। यह सम्मेलन ग्रेट ब्रिटेन, चीन और तिब्बत के बीच आयोजित हुआ था।

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 26 अक्टूबर को विलय दिवस मनाया गया

केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 26 अक्टूबर को भारत के जम्मू साथ जम्मू-कश्मीर का विलय दिवस मनाया गया। 



26 अक्टूबर, 1947 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत का हिस्सा बनने के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

जम्मू-कश्मीर में विलय दिवस के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश होता है। 5 अगस्त, 2019 को संविधान की धारा 370 और 35ए निरस्त होने के बाद वर्ष 2020 में पहली बार जम्मू-कश्मीर में आज के दिन आधिकारिक रूप से सार्वजनिक अवकाश घोषित हुआ। 

विलय पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिस पर जम्मू-कश्मीर रियासत के शासक महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को हस्ताक्षर किए थे। 

स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के अंतर्गत इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके महाराजा हरि सिंह भारत में शामिल होने पर सहमत हुए थे। 

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के सैनिकों और जनजातियों के कश्मीर पर हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों से मदद मांगी थी। 

तब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की शर्त पर उनकी मदद की थी।

जम्मू-कश्मीर

  • राजधानी : 
    • ग्रीष्मकालीन (मई से अक्टूबर) : श्रीनगर
    • शीतकालीन (नवंबर से अप्रैल) : जम्मू
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विभाजन : 31 अक्टूबर, 2019
  • वर्तमान उपराज्यपाल : मनोज सिन्हा

कराधान और शेयर बाजार व्यवस्था में किये गये बदलाव 1 जुलाई से लागू

कराधान और शेयर बाजार व्यवस्था में किये गये बदलाव 1 जुलाई से लागू हो गये हैं। 

सरकार ने वर्ष 2022 के केन्द्रीय बजट में क्रिप्टोकरेंसी पर आय पर कर कटौती (टीडीएस) एक प्रतिशत का प्रावधान किया था। इस साल अप्रैल से क्रिप्टोकरेंसी पर 30 फीसदी आयकर लगाया


गया । 


पैन को आधार से जोडने का शुल्क भी दोगुना हो गया है। पहले यह शुल्क पांच सौ रूपये था। अब इसे एक हजार रूपये कर दिया गया है। 

डॉक्टरों और सोशल मीडिया पर उनके सामान की बिक्री को प्रोत्साहन देने वालों को मिले लाभ पर 10 प्रतिशत टीडीएस लगेगा।एक वित्त वर्ष में 20 हजार रुपये से अधिक लाभ होने पर ही यह व्यवस्था लागू होगी। 

पिछले महीने, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने घोषणा की थी कि सभी डीमैट खातों को इस साल 30 जून तक टैग करने की आवश्यकता है। 1 जुलाई से बिना टैग वाले किसी भी डीमैट खाते में प्रतिभूतियां जमा करने की अनुमति नहीं होगी।

यूपीएससी 2021 रिजल्ट: श्रुति शर्मा टॉपर, पहली तीनों टॉपर महिलाएं

संघ लोक सेवा आयोग ने सोमवार को साल 2021 की सिविल परीक्षा परीक्षा के नतीज़े जारी कर दिए। श्रुति शर्मा ने टॉप किया है।


रिज़ल्ट में पहला तीन स्थान महिला उम्मीदवारों के नाम रहा है। श्रुति शर्मा के बाद दूसरे नंबर पर अंकिता अग्रवाल और तीसरे नंबर पर गामिनी सिंगला आई हैं। तीनों टॉप रैंकर के अलावा, ऐश्वर्य वर्मा ने चौथा स्थान हासिल किया है जबकि उत्कर्ष द्विवेदी पांचवें स्थान पर रहे हैं।

केंद्र सरकार में कार्मिक विभाग के मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने टॉप करने वाली तीनों महिला उम्मीदवारों को बधाई दी है।



इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 685 उम्मीदवार कामयाब रहे हैं। यूपीएससी ने सफल होने वाले उम्मीदवारों के बारे में अभी कोई और जानकारी नहीं दी है।

संघ लोक सेवा आयोग ने बताया कि सफल उम्मीदवारों में 244 सामान्य वर्ग से, 73 ईडब्ल्यूएस, 203 अन्य पिछड़ा वर्ग, 105 अनुसूचित जाति और 60 अनुसूचित जनजाति के हैं।

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा का हर साल आयोजन करती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा और पुलिस सेवा जैसी अहम केंद्रीय सेवाओं के लिए ये परीक्षा तीन चरणों- प्रिलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू- में ली जाती है।

यूपीएससी की मुख्य या लिखित परीक्षा इस साल जनवरी के महीने में ली गई थी और अप्रैल और मई में इंटरव्यू का आयोजन किया गया था।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि यूपीएससी के बयान के मुताबिक़ 80 उम्मीदवारों की दावेदारी फिलहाल प्रोविजनल रखी गई है जबकि एक उम्मीदवार का परिणाम रोक कर रखा गया है। 

सिविल परीक्षा परीक्षा के नतीज़े संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं। रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर मार्क्स जारी कर दिए जाएंगे।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस


आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस है। यह दिन 1998 में पोकरण में परमाणु परीक्षण की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हर वर्ष नवाचार और देश में उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों के लिए भी मनाया जाता है।


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाना देश के वैज्ञानिकों की खोज, प्रौद्योगिकी रचनात्मकता और नवाचार के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 1998 में सफल पोकरण परीक्षण के लिए राष्ट्र के वैज्ञानिकों और उनके प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया है। 

भारत और श्रीलंका की सेनाओं के बीच सलाइनेक्स युद्धाभ्यास

भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच नौवां युद्धाभ्यास-स्लाइनेक्स 7 मार्च से विशाखापट्टणम में शुरू हो रहा है। 



यह युद्धाभ्यास दो चरणों में होगा। पहला चरण सात और आठ मार्च को विशाखापट्टणम में, जबकि दूसरा चरण नौ और दस मार्च को बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जाएगा।

श्रीलंका की नौसेना का नेतृत्व युद्धपोत एस एल एन एस सयुराला करेगा, जबकि भारतीय नौसेना आईएनएस क्रीच की अगुवाई में युद्धाभ्यास में भाग लेगी। युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना के आईएनएस ज्योति, अत्याधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर, सीकिंग और चेतक हेलीकॉप्टर तथा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान भाग लेंगे। 

इससे पहले अक्तूबर 2020 में स्लाइनेक्स युद्धाभ्यास का आयोजन किया गया था।


स्लाइनेक्स युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बहुआयामी समुद्री अभियानों के लिए श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और पद्धतियों का आदान-प्रदान करना और अंतर-संचालन क्षमता में वृद्धि और आपसी समझ बढ़ाना है।

कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...