कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

 

कर्नाटक सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए और आंध्रप्रदेश सरकार ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लागया है। इस तरह कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया हैं। 

सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों की यह घोषणा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-2027 के बजट भाषण में की है, जबकि आंध्रप्रदेश के मुखेमन्त्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा की इस नियम को लागू करने के लिए लगभग 90 दिनों में व्यवस्था बनाई जाएगी। 

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में 15-24 आयु वर्ग के लोगों में अत्यधिक स्क्रीन उपयोग और बिगड़ती मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को उजागर किया है। इसमें चिंता, नींद संबंधी विकार और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी सबसे प्रमुख लक्षण बताया गया है। 


 प्रतिबंध के कारण

  • बच्चों में सोशल मीडिया की लत बढ़ना । 
  • साइबर बुलिङ्ग और गलत कंटेन्ट से सुरक्षा 
  • पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को कम करना। 

 कानूनी पक्ष

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार संचार और डिजिटल मध्यस्थों का विनियमन केंद्र सरकार के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आता है। यह मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश) नियम 2021 द्वारा नियंत्रित होता है।  हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और बाल कल्याण, दोनों राज्य सूची के विषय है। इसीलिए कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि इससे संवैधानिक उपयुक्तता और विधायी क्षमता के प्रश्न उठ सकते हैं।


 सोशल मीडिया पर वैश्विक प्रतिबंध

 अब तक कई देशों ने सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु संबंधी प्रतिबंध लगा चूके है। इसमें सबसे पहले नंबर पर हैं आस्ट्रेलिया। आस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया दिया है। 

 इसके बाद फ्रांस, स्पेन, इंडोनेशिया, नेपाल आदि देशों ने भी सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है।  


 प्रतिबंध के खिलाफ़ आलोचकों का पक्ष

 सरकारों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंधों को लेकर कई आलोचक विरोध कर रहे है। इस विरोध के निम्नलिखित कारण है:

  •  इंटरनेट उपयोग की स्वतंत्रता:  कई आलोचक मानते हैं कि इंटरनेट उपयोग की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना डिजिटल उनके अधिकारों का हनन है। 

  •  डिजिटल साक्षरता और योग्यता:  क्राई आलोचकों का कहना है कि इस प्रतिबंध से बच्चों में डिजिटल साक्षरता और योग्यता से वंचित हो जाएंगे। 

  •  लैंगिक असमानता:  भारत में केवल 33.3% महिलाओं ने ही इंटरनेट का उपयोग किया जबकि पुरुषों का प्रतिशत 57.1% है।  बाल संरक्षण के नाम पर प्रतिबंध से माता-पिता अपने बेटियों के लिए डिवाइस के उपयोग में असमानता बढ़ा सकते। 

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: डिजिटल अभिव्यक्ति को सीमित कर सकता है।



निष्कर्ष 

सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध अतार्किक है। डिजिटल हो रही दुनिया में बच्चों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना देश के विकास में अहम योगदान दे सकता है। हालांकि इसके अविनियमित उपयोग से हो रहे दुष्प्रभाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सोशल मीडिया का विनियमित उपयोग अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसमें अभिभावक, शिक्षक, समाज, सरकार और उद्योग जगत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसमें लाभ को बढ़ाने और हानिकारक प्रभावों को कम करने पर विचार किया जा सकता है।


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