ग्लोबल नेटवर्क ऑफ एज-फ्रेंडली सिटीज एंड कम्युनिटीज (GNAFCC)

कोझिकोड शहर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ग्लोबल नेटवर्क ऑफ एज-फ्रेंडली सिटीज एंड कम्युनिटीज (GNAFCC) की सदस्यता से सम्मानित किया गया है।



GNAFCC के बारे में:

स्थापनाः 2010 में।

सदस्यः 51 देशों के 1300 सदस्य शहर और समुदाय ।

लक्ष्यः विश्व भर के शहरों, समुदायों और संगठनों को जोड़ना, ताकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रहने योग्य समाज विकसित किया जा सके।

मुख्य उद्देश्यः प्रेरणा देना, यह दर्शाकर कि क्या किया जा सकता है और कैसे किया जा सकता है।

दुनिया भर के शहरों और समुदायों को जोड़कर जानकारी, अनुभव एवं ज्ञान का आदान-प्रदान करना।

नवाचार पर आधारित और प्रमाणित समाधान खोजने में समुदायों की मदद करना।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 'मानव विकास रिपोर्ट, 2025' जारी की

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 'मानव विकास रिपोर्ट, 2025' जारी की। यह रिपोर्ट 'ए मैटर ऑफ चॉइसः पीपल एंड पॉसिबिलिटीज इन द एज ऑफ एआई' शीर्षक से जारी की गई है। रिपोर्ट का यह शीर्षक रेखांकित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव विकास के अगले चरण को दिशा देने में कितनी अहम भूमिका निभा रहा है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजरः

मानव विकास रिपोर्ट, 2025 में विश्व के 193 देशों में आइसलैंड 0.972 अंकों के साथ मानव विकास सूचकांक में पहले स्थान पर है जबकि दक्षिणी सूडान 0.388 अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर है।

इस रैंकिंग में भारत 130वें स्थान पर है। पिछली रिपोर्ट की तुलना में भारत की रैंकिंग में तीन स्थानों का सुधार हुआ है। भारत अभी भी "मध्यम मानव विकास" वाले देशों की श्रेणी में बना हुआ है। भारत का HDI स्कोर 0.685 है।

वैश्विक स्तर पर मानव विकास की प्रगति 1990 के बाद से सबसे धीमी रही है।

निम्न और अत्यंत उच्च HDI रैंकिंग वाले देशों के बीच असमानता लगातार चौथे वर्ष बढ़ी है।

मानव विकास सूचकांक (HDI) एक समग्र सूचकांक है, जो मानव विकास के तीन मूलभूत आयामों में औसत उपलब्धि को मापता है।

ये आयाम हैं- दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन; ज्ञान (नॉलेज) और सम्मानजनक जीवन स्तर ।

जीवन प्रत्याशाः भारत में जीवन प्रत्याशा 2023 में बढ़कर 72 वर्ष हो गई। HDI गणना की शुरुआत के बाद से भारत में यह सबसे अधिक जीवन प्रत्याशा है।

शिक्षाः भारत में स्कूली शिक्षा में व्यतीत की गई औसत अवधि अब 13 वर्ष है। 1990 में यह अवधि 8.2 वर्ष थी।



भारत की प्रगति के बावजूद चुनौतियां

राष्ट्रीय आयः विश्व में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) रैंकिंग, HDI रैंकिंग से सात स्थान नीचे है।

असमानताः पुरुषों एवं महिलाओं के बीच असमानताएं (Gender disparities) अब भी अधिक हैं। उदाहरण के लिए - लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) में भारत की रैंकिंग 102 वीं है।

भारत की निम्न रैंकिंग प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था अच्छी नहीं होने, राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व और कार्यबल में महिलाओं की कम भागीदारी का संकेत देती है।


मानव विकास रिपोर्ट 2025 में AI से जुड़े मुख्य बिंदु

भारत का AI परिदृश्यः मुख्य बिंदु

AI कौशल का विस्तारः भारत में खुद से रिपोर्ट किए गए AI कौशल का विस्तार वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है।

वैश्विक AI सूचकांकः वैश्विक AI सूचकांक में 36 देशों का मूल्यांकन किया गया। इसमें भारत चौथे स्थान पर है। इस तरह भारत इस सूचकांक में शीर्ष 10 में शामिल एकमात्र निम्न मध्यम आय वाला देश है।

प्रतिभा पलायन को रोकनाः भारत के 20% AI शोधकर्ता अब देश में ही कार्यरत हैं। 2019 में यह अनुपात लगभग शून्य था।

AI के वैश्विक प्रभाव की अपेक्षाएं: AI की वजह से रोजगार की क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि (ऑग्मेंटेशन) होगी, साथ ही ऑटोमेशन में भी वृद्धि होगी।

सर्वे में शामिल 61% लोगों ने कहा कि AI से रोजगार की क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी, जबकि जबकि 51% लोगों ने ऑटोमेशन में वृद्धि की बात स्वीकार की है।

भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का नया कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है

केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने परमेश्वरन अय्यर को IMF के कार्यकारी बोर्ड में भारत के प्रतिनिधि के रूप में नया कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया।



IMF कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) के बारे में

कार्यकारी बोर्ड IMF के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए जिम्मेदार होता है।

इसमें 25 निदेशक होते हैं। इन्हें सदस्य देशों या देशों के समूहों द्वारा चुना जाता है।

IMF का प्रबंध निदेशक (Managing Director) इस बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।

यह बोर्ड IMF के सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है।

यह बोर्ड उन सदस्य देशों को IMF से वित्तीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी देता है, जो अस्थायी भुगतान संतुलन की समस्याओं का सामना कर रहे होते हैं।

भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध की आशंका के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों से सिविल डिफेंस तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए मॉक ड्रिल्स आयोजित करने को कहा

गृह मंत्रालय ने देश के वर्गीकृत 244 सिविल डिफेंस जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल्स आयोजित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की आशंका जताई जा रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम सीमा पर पहुंच गया है।

सिविल डिफेंस जिले ऐसे जिले होते हैं, जिन पर सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से दुश्मन के हमलों का खतरा बना रहता है।



सिविल डिफेंस अभ्यास के बारे में

यह किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने का अभ्यास है। इसका उद्देश्य यह परीक्षण करना होता है कि युद्ध, मिसाइल हमले, हवाई हमले या आपदा जैसी आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान नागरिक और सरकारी तंत्र किस प्रकार प्रत्युत्तर देते हैं।

इस अभ्यास के दौरान अलग-अलग प्रकार के नागरिक सुरक्षा उपायों की संचालन क्षमता और समन्वय का मूल्यांकन किया जाता है। इस अभ्यास में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • हवाई हमले की चेतावनी प्रणालियों के प्रभावी होने की क्षमता का आकलन करना,
  • भारतीय वायुसेना के साथ हॉटलाइन या रेडियो संचार लिंक का संचालन करना, और कंट्रोल रूम की कार्यक्षमता की जाँच करना ।
  • शत्रुतापूर्ण हमले की स्थिति में नागरिकों और विद्यार्थियों को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण देना।
  • छद्म उपायों (Camouflaging) द्वारा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को हमले से बचाने की व्यवस्था करना।
  • हमले वाली जगह से सुरक्षित निकासी की योजना को अपडेट करना व उसका अभ्यास कराना।

पिछली बार ऐसी ड्रिल्स 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध से पहले आयोजित की गई थी।


भारत में सिविल डिफेंस के प्रावधान

नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968: यह अधिनियम भारत-चीन युद्ध (1962) और भारत-पाक युद्ध (1965) के बाद लागू किया गया था। यह वायु, भूमि, समुद्र या अन्य स्थानों से किसी भी प्रकार के शत्रुतापूर्ण हमले से जान-माल, स्थान या वस्तु की सुरक्षा के उपायों का प्रावधान करता है।

इस अधिनियम में नागरिक सुरक्षा वाहिनी (Civil Defence Corps) के गठन और नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के लिए नियम एवं कानून बनाने के प्रावधान किए गए हैं।

2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मध्यस्थता (Mediation) एक महत्वपूर्ण साधन

यह विचार राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित मध्यस्थता पर पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान व्यक्त किया। इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप "भारतीय मध्यस्थता संघ" की स्थापना की गई है।

भारतीय मध्यस्थता संघ का उद्देश्य विवादों के समाधान हेतु मध्यस्थता को एक प्राथमिक, संगठित और सुलभविकल्प के रूप में स्थापित करना और उसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करना है।



मध्यस्थता के बारे में

यह आर्बिट्रेशन और सुलह (Conciliation) के साथ-साथ वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्त्रों में से एक है।

2016 से लेकर 2025 के प्रारम्भ तक मध्यस्थता के जरिए 7,57,173 मामले निपटाए गए हैं।



मध्यस्थता का महत्व

न्यायपालिका पर बोझ में कमीः इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (IJR) 2025 के अनुसार, देश में न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या 5 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

किफायती और शीघ्र न्यायः मध्यस्थता से महंगे कानूनी शुल्क, अदालत के खर्च और लंबी कानूनी प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत होती है।

सहकारी समस्या समाधानः इसमें एक तटस्थ तीसरा पक्ष बिना किसी का पक्ष लिए, संवाद को प्रोत्साहित करता है और समाधान तक पहुंचने में मदद करता है।


भारत में मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम

मध्यस्थता अधिनियम, 2023: यह एक एकीकृत व संस्थागत कानूनी फ्रेमवर्क स्थापित करता है।

वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015: इसे 2018 में संशोधित किया गया था ताकि प्री-इंस्टीट्यूशन एंड सेटलमेंट (PIMS) की व्यवस्था प्रदान की जा सके।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019: यह उपभोक्ता विवादों को निपटाने के लिए मध्यस्थता को एक त्वरित, आसान और किफायती तरीका के रूप में प्रोत्साहित करता है।

सिंगापुर मध्यस्थता कन्वेंशनः भारत ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत 'स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म (SAP)' का सफल परीक्षण करने वाला चुनिंदा देशों में शामिल हुआ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म (SAP) के पहले सफल परीक्षण के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) है।

इसे एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा द्वारा विकसित किया गया है।

यह भारत की पृथ्वी-अवलोकन तथा खुफिया, निगरानी और टोही (Intelligence, Surveillance & Reconnaissance: ISR) क्षमता को बढ़ाएगा।



स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म (SAP) क्या है?

यह मानव-रहित एयरशिप है। यह पृथ्वी से 17 से 22 किलोमीटर की ऊंचाई पर समतापमण्डल (Stratosphere) में संचालित होता है।

यह हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (HAPS) के रूप में कार्य करता है और लंबे समय तक हवा में रह सकता है।


HAPS दो प्रकार के होते हैं:

एयरोडायनामिकः यह हवा से भारी हो सकता है, जैसे कि फिक्स्ड विंग वाले विमान ।

एयरोस्टेटिकः यह हवा से हल्का होता है, जैसे कि गुब्बारे और एयरशिप ।

लिफ्टिंग तंत्रः यह उड़ान के लिए हीलियम (Helium) गैस का उपयोग करता है।

ऊर्जा स्रोतः यह सौर ऊर्जा से संचालित होता है और रात्रि में संचालन के लिए ऑनबोर्ड बैटरियों का उपयोग करता है।


SAP के सामरिक लाभ

स्थायी निगरानीः यह सैटेलाइट या विमानों की तुलना में किसी क्षेत्र के ऊपर कई दिनों या कई सप्ताहों तक निगरानी रख सकता है। इससे लगातार निगरानी और संचार में सहायता मिलती है।

बहु-उपयोगी प्लेटफॉर्मः इसमें इमेजिंग सेंसर, रडार और टेलीकॉम पेलोड्स लगाए जा सकते हैं। इससे सीमाओं की निगरानी, आपदा प्रबंधन और खुफिया अभियानों में मदद मिलती है।

यह तकनीक ऐसे कार्यों को भी अंजाम देने में सक्षम है, जो सैटेलाइट और ड्रोन नहीं कर पाते। इससे अंतरिक्ष जैसी व्यापक कवरेज मिलती है, वह भी कम लागत में। साथ ही इसे तेजी से तैनात किया जा सकता है और आवश्यकता अनुसार, किसी भी समय और किसी भी रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।

भारत सरकार ने बगलिहार बांध से जल के प्रवाह को घटा दिया है

हाल ही में, भारत सरकार ने बगलिहार बांध से जल के प्रवाह को घटा दिया है। सरकार ने यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद लिया है।

बगलिहार बांध जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोपावर परियोजना का एक हिस्सा है।



चिनाब नदी के बारे में

चिनाब, सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।

यह नदी पाकिस्तान के मिथानकोट में सिंधु नदी में मिल जाती है।

उद्गम स्थलः यह नदी हिमाचल प्रदेश में बारालाचा दर्रा के दोनों ओर से निकलने वाली दो धाराओं- चंद्रा और भागा के संगम से बनती है। इसलिए इसे कभी-कभी चंद्रभागा नदी भी कहा जाता है।

प्रमुख सहायक नदियां: मियार नाला, सोहल, मरूसुदर (Marusudar), लिद्दर नदी, आदि।

झेलम नदी, पाकिस्तान में झांग के पास चिनाब में मिलती है।

रूस ने मैन-पोर्टेबल 'इग्ला-एस (Igla-S)' मिसाइल भारत को दिया

हाल ही में रूस ने भारतीय थल सेना को शत्रुओं के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और जेट विमानों से निपटने के लिए नए इग्ला-एस मिसाइल सिस्टम दिए है।



इगला-एस (Igla-S) मिसाइल के बारे में

इगला-एस मैन-पोर्टेबल है यानी इसे एक आदमी भी ढो सकता है। यह कंधे से दागी जाने वाली व सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे अधिक खतरे वाले क्षेत्रों में तैनात जमीनी सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

यह वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) का एक अत्याधुनिक संस्करण है।


इगला-एस (Igla-S) की प्रमुख विशेषताएं

यह इन्फ्रारेड (IR) होमिंग तकनीक का उपयोग करती है। यह हवाई लक्ष्यों की हीट सिग्नेचर को पहचान करके उन्हें निशाना बनाती है।

मिसाइल दागे जाने के बाद, यह स्वतः टारगेट के इंजन से निकलने वाली हीट का पीछा करती है।

यह विशेषता इसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर जैसे तेज और छोटे लक्ष्यों को निशाना बनाने में कुशल बनाती है।

यह मिसाइल 6 किलोमीटर दूर तक और 3.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक के लक्ष्य को भेद सकती है।

अमेरिका ने भारत को अपनी निगरानी क्षमता को बढ़ाने के लिए हॉकआई (HawkEye) 360 प्रौद्योगिकी की बिक्री को मंजूरी दी

हाल ही में, अमेरिका ने भारत को हॉकआई 360 तकनीकी उपकरण की बिक्री को मंजूरी दी है ताकि भारत अपनी निगरानी क्षमता को बढ़ा सके।



हॉकआई 360 तकनीक के बारे में

इसके तहत रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) सिग्नल्स का पता लगाने, जिओलोकेट करने और उनका विश्लेषण करने के लिए निम्न भू-कक्षा में मौजूद तीन उपग्रहों के समूहों का उपयोग किया जाता है।


भारत के लिए हॉकआई 360 का  महत्व

  • यह उन जहाजों का पता लगा सकता है जो विवादित या संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद कर देते हैं।
  • इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री क्षेत्र संबंधी जागरूकता बढ़ेगी।
  • भारतीय सशस्त्र बल अब मछली पकड़ने की अवैध गतिविधियों और तस्करी पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से निगरानी रखने और कार्रवाई करने में सक्षम होंगे।

भारत जीनोम एडिटेड धान (चावल) की किस्में विकसित करने वाला दुनिया का पहला देश बना

 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की पहली जीनोम-एडिटेड चावल की किस्में विकसित की है। इन किस्मों के नाम है- DRR चावल 100 (कमल) और पुसा DST चावल-1। यह उपलब्धि भारत को जिनोम एडिटिंग तकनीक से चावल विकसित करने वाला दुनिया का पहला देश बनती है।



चावल की ये किस्में CRISPR-Cas आधारित जिनोम एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है। CRISPR-Cas आधारित जिनोम एडिटिंग तकनीक में किसी प्रजाति या फसल किस्म में किसी अन्य प्रजाति के DNA को प्रवेश कराए बिना उसके अनुवांशिक पदार्थ में सटीक संशोधन कर दिया जाता है। 

भारत की बायो सेफ्टी नियमावली के तहत सामान्य फसलों में साइट निर्देशित न्यूक्लीज-1 (SDN1) और SDN2 प्रकार की जिनोम एडिटिंग को मंजूरी दी गई है। 

ICAR ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान निधि (NASF) की सहायता से उपयुक्त किस्मों का विकास किया है। NASF कृषि अनुसंधान में मौलिक और राणनीतिक अध्ययन को सहायता प्रदान करती है।


चावल की नई जीनोम-एडिटेड किस्मों के बारे में

DRR चावल 100 (कमल): 

इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) हैदराबाद ने विकसित किया है। इस किस्म के विकास के लिए 'सांबा महसूरी' चावल की किस्म में CKX2 (साइटोकाइनिन ऑक्सीडेज 2) जिन को संशोधित किया गया। साइटोकाइनिन पादप हार्मोन है जो पौधों की वृद्धि और कोशिका विभाजन में भूमिका निभाता है।

पुसा DST चावल-1 :

इस किस्म का विकास ICAR के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली ने किया है। यह MTU 1010 (कॉटनडोरा सन्नालू) नामक बारीक दानों वाली चावल की उन्नत किस्म है। 


साइट डायरेक्टेड न्यूक्लीज (SDN) के प्रकार

 SDN-1: इसमें DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग किए बिना लक्षित उत्परिवर्तन (म्यूटेजेनेसिस) किया जाता है। इसमें पौधे के प्राकृतिक रिपेयर मेकैनिज्म का उपयोग किया जाता है।

SDN-2: इसमें DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग करके लक्षित परिवर्तन किया जाता है। इसमें भी किसी बाहरी जिन को प्रवेश नहीं कराया जाता है।

SDN-3: इसमें किसी जीव में DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग करके बाहरी जिन या बड़े डीएनए सीक्वेंस को प्रवेश कराया जाता है, ताकि वांछित गुण प्राप्त किया जा सके।

 

जीनोम एडिटेड चावल की किस्मों के लाभ 

उत्पादकता में वृद्धि: उपज में 19% की वृद्धि हो सकती है।

जल संरक्षण को बढ़ावा: 7500 मिलियन क्यूबिक मीटर सिंचाई जल की बचत होगी। 

जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलना: इससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 20% की कमी आ सकती है। 

अन्य लाभ: ऐसी चावल की किस्म सूखा, लवणता और जलवायु परिवर्तन को सह सकती है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर उपज प्रदान कर सकती है।

कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...