रूस ने मैन-पोर्टेबल 'इग्ला-एस (Igla-S)' मिसाइल भारत को दिया

हाल ही में रूस ने भारतीय थल सेना को शत्रुओं के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और जेट विमानों से निपटने के लिए नए इग्ला-एस मिसाइल सिस्टम दिए है।



इगला-एस (Igla-S) मिसाइल के बारे में

इगला-एस मैन-पोर्टेबल है यानी इसे एक आदमी भी ढो सकता है। यह कंधे से दागी जाने वाली व सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे अधिक खतरे वाले क्षेत्रों में तैनात जमीनी सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

यह वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) का एक अत्याधुनिक संस्करण है।


इगला-एस (Igla-S) की प्रमुख विशेषताएं

यह इन्फ्रारेड (IR) होमिंग तकनीक का उपयोग करती है। यह हवाई लक्ष्यों की हीट सिग्नेचर को पहचान करके उन्हें निशाना बनाती है।

मिसाइल दागे जाने के बाद, यह स्वतः टारगेट के इंजन से निकलने वाली हीट का पीछा करती है।

यह विशेषता इसे ड्रोन, हेलीकॉप्टर जैसे तेज और छोटे लक्ष्यों को निशाना बनाने में कुशल बनाती है।

यह मिसाइल 6 किलोमीटर दूर तक और 3.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक के लक्ष्य को भेद सकती है।

अमेरिका ने भारत को अपनी निगरानी क्षमता को बढ़ाने के लिए हॉकआई (HawkEye) 360 प्रौद्योगिकी की बिक्री को मंजूरी दी

हाल ही में, अमेरिका ने भारत को हॉकआई 360 तकनीकी उपकरण की बिक्री को मंजूरी दी है ताकि भारत अपनी निगरानी क्षमता को बढ़ा सके।



हॉकआई 360 तकनीक के बारे में

इसके तहत रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) सिग्नल्स का पता लगाने, जिओलोकेट करने और उनका विश्लेषण करने के लिए निम्न भू-कक्षा में मौजूद तीन उपग्रहों के समूहों का उपयोग किया जाता है।


भारत के लिए हॉकआई 360 का  महत्व

  • यह उन जहाजों का पता लगा सकता है जो विवादित या संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद कर देते हैं।
  • इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री क्षेत्र संबंधी जागरूकता बढ़ेगी।
  • भारतीय सशस्त्र बल अब मछली पकड़ने की अवैध गतिविधियों और तस्करी पर पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से निगरानी रखने और कार्रवाई करने में सक्षम होंगे।

भारत जीनोम एडिटेड धान (चावल) की किस्में विकसित करने वाला दुनिया का पहला देश बना

 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की पहली जीनोम-एडिटेड चावल की किस्में विकसित की है। इन किस्मों के नाम है- DRR चावल 100 (कमल) और पुसा DST चावल-1। यह उपलब्धि भारत को जिनोम एडिटिंग तकनीक से चावल विकसित करने वाला दुनिया का पहला देश बनती है।



चावल की ये किस्में CRISPR-Cas आधारित जिनोम एडिटिंग तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है। CRISPR-Cas आधारित जिनोम एडिटिंग तकनीक में किसी प्रजाति या फसल किस्म में किसी अन्य प्रजाति के DNA को प्रवेश कराए बिना उसके अनुवांशिक पदार्थ में सटीक संशोधन कर दिया जाता है। 

भारत की बायो सेफ्टी नियमावली के तहत सामान्य फसलों में साइट निर्देशित न्यूक्लीज-1 (SDN1) और SDN2 प्रकार की जिनोम एडिटिंग को मंजूरी दी गई है। 

ICAR ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान निधि (NASF) की सहायता से उपयुक्त किस्मों का विकास किया है। NASF कृषि अनुसंधान में मौलिक और राणनीतिक अध्ययन को सहायता प्रदान करती है।


चावल की नई जीनोम-एडिटेड किस्मों के बारे में

DRR चावल 100 (कमल): 

इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) हैदराबाद ने विकसित किया है। इस किस्म के विकास के लिए 'सांबा महसूरी' चावल की किस्म में CKX2 (साइटोकाइनिन ऑक्सीडेज 2) जिन को संशोधित किया गया। साइटोकाइनिन पादप हार्मोन है जो पौधों की वृद्धि और कोशिका विभाजन में भूमिका निभाता है।

पुसा DST चावल-1 :

इस किस्म का विकास ICAR के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली ने किया है। यह MTU 1010 (कॉटनडोरा सन्नालू) नामक बारीक दानों वाली चावल की उन्नत किस्म है। 


साइट डायरेक्टेड न्यूक्लीज (SDN) के प्रकार

 SDN-1: इसमें DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग किए बिना लक्षित उत्परिवर्तन (म्यूटेजेनेसिस) किया जाता है। इसमें पौधे के प्राकृतिक रिपेयर मेकैनिज्म का उपयोग किया जाता है।

SDN-2: इसमें DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग करके लक्षित परिवर्तन किया जाता है। इसमें भी किसी बाहरी जिन को प्रवेश नहीं कराया जाता है।

SDN-3: इसमें किसी जीव में DNA सीक्वेंस टेंप्लेट का उपयोग करके बाहरी जिन या बड़े डीएनए सीक्वेंस को प्रवेश कराया जाता है, ताकि वांछित गुण प्राप्त किया जा सके।

 

जीनोम एडिटेड चावल की किस्मों के लाभ 

उत्पादकता में वृद्धि: उपज में 19% की वृद्धि हो सकती है।

जल संरक्षण को बढ़ावा: 7500 मिलियन क्यूबिक मीटर सिंचाई जल की बचत होगी। 

जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलना: इससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 20% की कमी आ सकती है। 

अन्य लाभ: ऐसी चावल की किस्म सूखा, लवणता और जलवायु परिवर्तन को सह सकती है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर उपज प्रदान कर सकती है।

शक्ति दुबे (Shakti Dubey), संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त कर अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया

 प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) की निवासी शक्ति दुबे (Shakti Dubey) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक वन प्राप्त कर देशभर में सुर्ख़ियों में आ गई है। उनकी सफलता की कहानी समर्पण, धैर्य और निरंतर प्रयास का प्रतीक है।

      तो आईए जानते हैं कि शक्ति दुबे की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या रही,  उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कैसे की, साथ ही उनकी फैमिली पृष्ठभूमि कैसा रहा, और भी बहुत कुछ विस्तृत में जानेंगे।



शैक्षणिक पृष्ठभूमि

  • स्कूलिंग: प्रयागराज में प्रारंभिक शिक्षा।
  • स्नातक: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बायोकैमेस्ट्री में बी.एससी.। 
  • स्नातकोत्तर: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से बायोकैमेस्ट्री में एम.एससी. (2018 में पूर्ण)।
हालांकि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि विज्ञान में थी, लेकिन UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने "राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध" (PSIR) को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।



UPSC यात्रा और रणनीति

  • तैयारी अवधि: लगभग 7 वर्षों तक निरंतर तैयारी। 
  • प्रयासों की संख्या: पांचवें प्रयास में सफलता प्राप्त की।
  • उम्र: लगभग 30 वर्ष।
  • कोचिंग: बाजीराव और और रवि संस्थान से जनरल स्टडीज, मेन्स टेस्ट सीरीज और इंटरव्यू गाइडेंस प्रोगाम में भाग लिया।

शक्ति ने बताया कि BHU में पढ़ाई के दौरान नीति-निर्माण और सार्वजनिक सेवा में उनकी रुचि बढ़ी। एक घटना, जब उन्होंने रात में एक पुलिस पेट्रोल वैन को देखकर सुरक्षा का अनुभव किया, ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।

शक्ति दुबे की सफलता के पीछे एक ठोस रणनीति और समर्पित अध्ययन योजना थी। UPSC जैसी कठिन परीक्षा के लिए उन्होंने एक लंबी, निरंतर और रणनीतिक तैयारी की। आइए उनकी रणनीति और अध्ययन सामग्री (Study Resources) को बारीकी से समझते हैं:

UPSC तयारी रणनीति

  1. विषय का गहन चयन
    • वैकल्पिक विषय (Optional): राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR)
    • कारण: उन्होंने महसूस किया कि यह विषय उनके सोचने के तरीके से मेल खाता है और इसमें उनका व्यक्तिगत रुझान भी था। 
  2. साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारण 
    • उन्होंने लंबी योजनाओं की बजाय साप्ताहिक लक्ष्य बनाएं, जिससे निरंतरता बनी रही और डेडलाइन का दबाव कम हुआ।
  3. पिछले वर्षों के प्रयासों का विश्लेषण
    • हर विषय के लिए पिछले 10 वर्षों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण किया।
    • इससे उन्हें ट्रेंड समझने में मदद मिली।
  4. उत्तर लेखन अभ्यास 
    • दैनिक उत्तर लेखन किया (मेन्स के लिए खास)।
    • Vajiram & Ravi और Forum IAS की टेस्ट सीरीज से अभ्यास किया।
    • उन्होंने यह माना कि उत्तर लेखन की गुणवत्ता बढ़ाने से ही Mains में सफलता संभव है।
  5. करंट अफेयर्स की तैयारी
    • नियमित रूप से The Hindu और Indian Express पढ़ा। 
    • इसके अलावा, उन्होंने Vision IAS और Insights IAS के डेली करंट अफेयर्स का भी अध्ययन किया।
    • करंट अफेयर्स को स्टैटिक टॉपिक से जोड़कर पढ़ना उनकी खास रणनीति थी।

अध्ययन सामग्री (Study Redources)

  • इतिहास (Modern) : Specturm by Rajiv Ahir
  • भूगोल : NCERTs (6-12), GC Leong
  • अर्थव्यवस्था : Sriram IAS Notes, Mrunal.org
  • विज्ञान व तकनीक : PIB, Newspapers, Vision IAS Notes
  • पर्यावरण : Shankar IAS Book, Current Affairs
  • भारतीय राजनीति : Laxmikanth (Bible for Polity)
  • करेंट अफ़ेयर्स : The Hindu, Vision Monthly, Insights
  • वैकल्पिक विषय (PSIR), पेपर-1 : IGNOU Notes, Subhra Rajan Ma'am की Class Notes
  • वैकल्पिक विषय (PSIR), पेपर-2 : International Relation के लिए Rajiv Sikari और Articles from ORF & IDSA

टाइम मैनेजमेंट और मोटिवेशन

  • सुबह जल्दी उठना और दिन के हिसाब से शेड्यूल बनाना।
  • रिवीजन के लिए संडे को फिक्स किया था।
  • जब थकान या निराशा होती थी तो प्रेरणा के लिए खुद की प्रगति की तुलना पुराने समय से करती थी।


पारिवारिक पृष्ठभूमि

शक्ति दुबे का जन्म और पालन पोषण प्रयागराज के नैनी क्षेत्र के सोमेश्वर नगर कॉलोनी में हुआ। उनके माता-पिता शिक्षण क्षेत्र से जुड़े हैं, जिन्होंने उन्हें मेहनत और ईमानदारी के मूल्य सिखाएं। उनके पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में एक इंस्पेक्टर है।


प्रेरणादायक संदेश

एक साक्षात्कार में शक्ति ने साझा किया कि पिछले प्रयास में कटऑफ से 15 अंक कम रहने के बाद वह निराश थी। लेकिन उनके भाई ने उन्हें प्रेरित किया और कहा, "भगवान ने तुम्हें रैंक वन के लिए बचा कर रखा है।" 

       दुबे अपनी इस कठिन यात्रा के अनुभव को कुछ इस प्रकार मंत्रों में पिरोया है:

" हर असफल प्रयास में सुधार की संभावना होती है। परीक्षा सिर्फ ज्ञान की नहीं मानसिक संतुलन की भी परीक्षा होती है।" - शक्ति दुबे


निष्कर्ष

शक्ति दुबे की सफलता की कहानी उन सभी UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि समर्पण, सही रणनीति और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियोों को यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्लल्ड रजिस्टर’ मेें शामिल किय गया

हाल ही में, यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी 'मेमोरी आफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कुल 74 नई प्रविष्टियां शामिल किया है।

इनमें भारत की भगवत गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियों को भी यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।



यूनेस्को के इस रजिस्टर में अब भारत की कुल 14 प्रविष्टियां (अभिलेख) शामिल हो गई हैैं। इसमें भारत के ऋग्वेद, गिलगित पांडुलिपि, अभिनवगुप्त (940-1015 ई.) की पांडुलिपियां, मैत्रेव्याकरण (पाल काल की एक पांडुलिपि) को भी शामिल किया गया है।

वर्ष 1948 मेें पेरिस मेें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित ‘मानवाधिकारों पर सार्वभौमिक घोषणा’ भी रजिस्टर मेें शामिल की गई नई प्रविष्टियों मेें से एक है।

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र के बारे मेें

भगवद् गीता:

भगवद् गीता को गीता के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदुओं का एक धार्मिक ग्रंथ है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक है। यह ग्रंथ महाभारत में भीष्मपर्व (अध्याय 23-40) का एक हिस्सा है।

इसे कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र मेें भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद के रूप मेें संकलित किया गया है।

इसे दूसरी या पहली शताब्दी ई. पू. मेें रचित माना जाता है।

आप को बता दें कि महाभारत की रचना महर्षि वेद व्यास ने 3100-1200 ईसा पूर्व की थी।

प्रासंगिकता: इसे सार्थक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक मार्गदर्शक माना जाता है।

नाट्यशास्त्र:

इसे नाट्यवेद का सार माना जाता है। नाट्यशास्त्र निष्पादन कलाओं की एक मौखिक परंपरा है, जिसमेें 36,000 छंद शामिल
हैैं। इसे गंधर्ववेद के नाम से भी जाना जाता है।



यह नाटक (नाट्य), निष्पादन (अभिनय), सौंदर्य भावना (रस), भावना (भाव) और संगीत (संगीत) से संबंधित है

ऐसा माना जाता है कि इसे भरतमुनि ने संस्कृत मेें दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास संहिताबद्ध किया था।

इसने भारतीय काव्यशास्त्र, रंगमंच, नत्यृ और सौंदर्यशास्त्र की नीवं रखी।


यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड प्रोग्राम

यूनेस्को ने इसे 1992 मेें शुरू किया था। इसका उद्देश्य विश्व की मूल्यवान दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करना और उसे सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाना है।

यह मानव सभ्यता को प्रभावित करने वाली दस्तावेजी विरासत को मान्यता देता है।

इसका उद्देश्य ऐतिहासिक ग्रंथों, पांडुलिपियों और अभिलेखागार को संरक्षित करना तथा उन तक पहुुंच को बढ़़ावा देना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पहला उर्ध्वाधर उठने वाला (Vertical lift) समुद्री रेलवे पुल का उद्घाटन किया

हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन किया। यह भारत का पहला उर्ध्वाधर उठने (Vertical lift) वाला समुद्रीय रेलवे पुल है।

वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज एक प्रकार का मुवेबल ब्रिज (Moveable bridge) होता है। इसमें ब्रिज का एक छोटा-सा हिस्सा (पाट) लंबवत रूप से ऊपर की ओर उठता है। इस दौरान यह डेक के समानांतर रहता है। इस प्रकार जहाज आसानी से इसके नीचे से गुजर सकते हैं।




नए ब्रिज के बारे में

यह पुल 1914 में बने पुराने कैंटीलीवर ब्रिज की जगह बनाया गया है, जिसे 2022 में बंद कर दिया गया था। यह रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भारत भूमि से जोड़ता है। इसे रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने डिजाइन किया है। इसमें 72.5 मीटर का नेविगेशनल स्पैन है, जिसे 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है, ताकि बड़े जहाज आसानी से गुजर सकें। इस ब्रिज की कुल लंबाई 2.07 किलोमीटर है। इस ब्रिज को बनाने में 531 करोड रुपए की लागत आई है।

पंबन ब्रिज दो शहरों को जोड़ता है। इसमें से एक शहर रामेश्वरम (Rameshvaram) पंबन आइसलैंड पर स्थित है और दूसरा मंडपम (Mandapum) भारत के मुख्य भूमि पर स्थित है। पंबन आइसलैंड को रामेश्वरम आइसलैंड (Rameshvaram Island) भी कहते हैं। रामेश्वरम मंदिर (Rameshwar Temple) इसी आइसलैंड पर स्थित है। मंडपम और पंबन आइसलैंड तमिलनाडु (Tamilanadu) के रामनाथपुरम जिला के अंतर्गत आते हैं।

1914 में बना पंबन ब्रिज केवल एक रेलवे ब्रिज था। 1988 में इसी के समानांतर एक रोड ब्रिज बनाया गया। अब (2025 में) कमजोर हो गए पुराने पंबन रेलवे ब्रिज को रिप्लेस करने के लिए नया पंबन ब्रिज बनाया गया है।

अन्य जानकारी

पंबन आइसलैंड और श्रीलंका को जोड़ने वाली पाक जलडमरूमध्य पाक की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी को अलग करती है।

भारत के कुछ महत्वपूर्ण ब्रिज

  • चिनाब रेल पुल : यह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में से एक है। यह जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बना है।
  • अटल सेट : यह मुंबई में बना सबसे लंबा समुद्री पुल है।
  • बोगीबील पुल : यह असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना रेल-सह-सड़क पुल है।

Elon Musk की कंपनी X ने आई.टी. अधिनियम के उल्लंघन को लेकर भारत सरकार पर मुकदमा दायर किया

हाल ही में Elon Musk की सोशल मीडिया कंपनी X ने आई.टी. अधिनियम के उल्लंघन को लेकर केंद्र सरकार पर मुकदमा दायर किया है। कंपनी ने सोशल मीडिया पर कंटेंट को विनियमित करने और हटाने का आदेश देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आई.टी. अधिनियम की धारा 79 (3) (b) के उपयोग को चुनौती दी है। कंपनी ने तर्क दिया है कि सरकार द्वारा इस प्रावधान का "दुरुपयोग" आई.टी. अधिनियम के अन्य प्रावधानों जैसे धारा 69A के तहत उपलब्ध सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देता है।


        दरअसल, ये मामला पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया X पर Grok AI से पूछे गए प्रश्नों और उनके मिले उत्तरों पर मचे बवाल से उठा है। सरकार के दबाव में अधिकारियों ने X के अधिकारियों से विवादित कंटेंट को हटाने को कहा था। आप लोगों को बता दें कि Grok, X का AI चैटबॉट है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आई.टी. अधिनियम) की धाराओं 79, 79(3) (b) व 69A के बारे में

  • धारा 79: यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एवं ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं जैसे मध्यवर्तियों को "सेफ हार्बर (safe harbour)" संरक्षण प्रदान करती है। यह धारा उन्हें उनके प्लेटफॉर्म्स पर होस्ट की गई उपयोगकर्ता-जनित कंटेंट के लिए उत्तरदायित्व से बचाती है।
  • धारा 79 (3) (b): यदि कोई मध्यवर्ती सरकारी अधिसूचना पर गैर-कानूनी कंटेंट को ब्लॉक करने / हटाने में विफल रहता है तो "सेफ हार्बर" संरक्षण को हटा दिया जाता है।
  • धारा 69A: यह सरकार को केवल संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में दिए गए आधार पर ही कंटेंट को ब्लॉक करने के आदेश जारी करने की अनुमति देती है। यह अनुच्छेद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 'उचित प्रतिबंध' लगाता है।
  • श्रेया सिंघल मामले, 2015 में दिया गया निर्णयः कंटेंट को केवल धारा 69A के तहत प्रदान की गई प्रक्रियाओं या अदालत के आदेश के माध्यम से ही सेंसर किया जा सकता है।

2023 में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी निर्देशः

  • इसने सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों और पुलिस को निर्देश जारी किया था कि धारा 79 (3) (b) के तहत सूचनाओं को ब्लॉक करने संबंधी आदेश जारी किए जा सकते हैं। 2024 में, MeitY ने एक 'सहयोग' पोर्टल लॉन्च किया था। इस पर उपर्युक्त प्राधिकारी सूचनाओं को ब्लॉक करने संबंधी आदेश जारी और अपलोड कर सकते हैं।

X द्वारा उठाए गए मुद्दे

  • धारा 79 (3) (b) का दुरुपयोगः यह सरकार को प्रत्यक्ष रूप से सूचनाओं को ब्लॉक करने की शक्तियां नहीं देती है, बल्कि केवल उन परिस्थितियों का उल्लेख करती है, जिनके तहत मध्यवर्ती अपने "सेफ हार्बर" संरक्षण से वंचित हो सकता है।
  • श्रेया सिंघल निर्णय का उल्लंघनः MeitY के निर्देश धारा 69A का पालन करने की बजाय कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए धारा 79 (3) (b) को उपकरण मानकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हैं।

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताएं बढ़ी

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों में संदेह और डर का माहौल बन गया है। इन राज्यों को इस बात की चिंता है कि परिवार नियोजन का, जिनका उन्होंने प्रभावी ढंग से पालन किया, उसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं उत्तर के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को इसका (परिसीमन का) फायदा हो सकता है।



हाल ही में, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 25 फरवरी को केंद्र पर निशाना साधते हुए जनता से कहा कि अगले परिसीमन के बाद तमिलनाडु की 18 लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी। परिणामस्वरुप हमारे पास केवल 31 सांसद रह जाएंगे। आपको बता दें कि वर्तमान में तमिलनाडु से लोकसभा में कुल 39 सांसद चुनकर आते हैं।

एमके स्टालिन ने परिसीमन से पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों पर 5 मार्च को तमिलनाडु के राजनीतिक दलों की एक मीटिंग बुलाई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले ही वर्ष विधानसभा चुनाव होने है और स्टालिन केंद्र की एनडीए सरकार के धुर राजनीतिक विरोधी हैं।

स्टालिन के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया है कि परिसीमन के परिणामस्वरूप लोक सभा सीटों में होने वाली किसी भी वृद्धि में दक्षिणी राज्यों को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि आनुपातिक आधार पर दक्षिणी राज्यों की एक भी लोक सभा सीट कम नहीं की जाएगी।

2024 में 'द हिंदू' में प्रकाशित एक खबर में कहा गया था कि परिसीमन अभ्यास के संबंध में सार्वजनिक डोमेन में दो विकल्पों पर चर्चा की जा रही है- पहला, मौजूद 543 सीटों को जारी रखना और विभिन्न राज्यों के बीच उनका पुनर्वितरण करना (तालिका 1) और दूसरा, विभिन्न राज्यों के बीच आनुपातिक वृद्धि के साथ सीटों की संख्या को 848 तक बढ़ाना (तालिका 2)।



परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताएं

जनसंख्या नियंत्रणः जनसंख्या के आधार पर परिसीमन से लोक सभा में दक्षिणी राज्यों की सीटों की संख्या कम हो सकती है, जो उनके द्वारा जनसंख्या नियंत्रण हेतु प्रभावी प्रयासों के लिए एक दंड जैसा हो सकता है।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलनः जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से संसद में दक्षिणी राज्यों का प्रभाव और उनका राजनीतिक महत्त्व कम हो सकता है।

संघवाद और क्षेत्रीय स्वायत्तता पर असरः प्रतिनिधित्व में बड़े बदलाव से संघीय व्यवस्था कमजोर हो सकती है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय नीतियां मुख्य रूप से उत्तरी राज्यों के हितों के अनुसार बनाई जा सकती हैं। इससे दक्षिणी राज्यों के लोगों में असंतोष पैदा हो सकता है।


परिसीमन के बारे में

इसका तात्पर्य है कि लोकसभा और विधान सभाओं के लिए प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया।


संवैधानिक प्रावधानः

  • अनुच्छेद 82 और 170 में प्रत्येक राज्य को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों) में पुनः समायोजित करने का प्रावधान किया गया है। इसे ऐसे प्राधिकार और ऐसी रीति से किया जाएगा, जैसा संसद विधि द्वारा निर्धारित करे।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 में लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या पुनर्निर्धारित करने का प्रावधान है।


परिसीमन प्रक्रिया में संशोधन

  • वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन के तहत राज्यों की परिवार नियोजन योजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन के तहत सीटों की संख्या में परिवर्तन किए जाने पर वर्ष 2001 की जनगणना तक रोक लगा दी गई थी।
  •  वर्ष 1981 और वर्ष 1991 की जनगणना के बाद परिसीमन नहीं किया गया।
  • वर्ष 2002 में संविधान के 84वें संशोधन के साथ इस प्रतिबंध को वर्ष 2026 तक बढ़ा दिया गया।
  • परिसीमन की प्रक्रिया को प्रतिबंधित करने के पीछे सरकार का यह तर्क था कि वर्ष 2026 तक (अनुमानतः) सभी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि का औसत सामान हो जाएगा।
  • संविधान की 84वें संशोधन के अनुसार वर्ष 2026 की जनगणना के आंकड़े जारी होने तक लोकसभा का परिसीमन वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा।
  • साथ ही राज्यों के विधानसभाओं का परिसीमन वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।

परिसीमन आयोग (Delimitation Commission)

  • परिसीमन आयोग को सीमा आयोग (Boundary Commission) के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्रत्येक जनगणना के बाद भारत की संसद द्वारा संविधान के अनुच्छेद-82 के तहत एक परिसीमन अधिनियम लागू किया जाता है। 
  • परिसीमन आयोग का गठन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है तथा यह भारत निर्वाचन आयोग के सहयोग से कार्य करता है।
  • परिसीमन आयोग का गठन 1952, 1962, 1972 और 2002 के अधिनियमों के आधार पर अब तक चार बार वर्ष 1952, 1963, 1973 और 2002 में किया गया था।
  • पहले परिसीमन अभ्यास वर्ष 1950-51 में राष्ट्रपति (चुनाव आयोग की मदद से) द्वारा किया गया था।

परिसीमन आयोग की संरचना 

  • परिसीमन आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत न्यायाधीश द्वारा की जाती है।
  • इसके अतिरिक्त इस आयोग में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैं-
    •  मुख्य निर्वाचन आयुक्त या उसके द्वारा नामित कोई निर्वाचन आयुक्त।
    • संबंधित राज्यों के निर्वाचन आयुक्त।

सहयोगी सदस्य (Associate Members): 

आयोग परिसीमन प्रक्रिया के क्रियान्वयन के लिये प्रत्येक राज्य से 10 सदस्यों की नियुक्ति कर सकता है, जिनमें से 5 लोकसभा के सदस्य तथा 5 संबंधित राज्य की विधानसभा के सदस्य होंगे।


सहयोगी सदस्यों को लोकसभा स्पीकर तथा संबंधित राज्यों के विधानसभा स्पीकर द्वारा नामित किया जाएगा।


इसके अतिरिक्त परिसीमन आयोग आवश्यकता पड़ने पर निम्नलिखित अधिकारियों को बुला सकता है:

  • महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त, भारत (Registrar General and Census Commissioner of India)।
  • भारत के महासर्वेक्षक (The Surveyor General of India)।
  • केंद्र अथवा राज्य सरकार से कोई अन्य अधिकारी।
  • भौगोलिक सूचना प्रणाली का कोई विशेषज्ञ।
  • या कोई अन्य व्यक्ति, जिसकी विशेषज्ञता या जानकारी से परिसीमन की प्रक्रिया में सहायता प्राप्त हो सके।


परिसीमन आयोग की शक्तियाँ

  • परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र निकाय है, यह आयोग भारतीय संविधान के तहत प्रदत्त शक्तियों के माध्यम से देश में परिसीमन का कार्य करता है।
  • परिसीमन आयोग के आदेश राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट तिथि से लागू होते हैं।
  • आयोग के आदेशों को कानून की तरह जारी किया जाता है और इन आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद आयोग के आदेशों की प्रतियाँ लोकसभा और संबंधित विधानसभा के समक्ष रखी जाती हैं।
  • लोकसभा अथवा विधानसभा को परिसीमन आयोग के आदेशों में किसी भी प्रकार के संशोधन की अनुमति नहीं होती है।

आगे की राह

  • पिछले परिसीमन अभ्यास ने बताया कि भारत की जनसंख्या में वृद्धि हुई है तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व में परिणामी विषमता को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
  • परिसीमन की कसौटी के रूप में केवल जनसंख्या पर निर्भर रहने के बजाय अन्य कारकों जैसे कि विकास संकेतक, मानव विकास सूचकांक और परिवार नियोजन कार्यक्रमों को लागू करने के प्रयासों पर विचार करना चाहिये। यह राज्यों की ज़रूरतों और उपलब्धियों का अधिक व्यापक एवं न्यायसंगत प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा।
  • जिन राज्यों ने प्रभावी ढंग से परिवार नियोजन कार्यक्रमों को लागू किया है उनके प्रयासों की सराहना और पुरस्कृत किया जाना चाहिये।
  • संतुलित दृष्टिकोण को शामिल करने के लिये निधियों के हस्तांतरण के दिशा-निर्देशों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिये। 



इक होर अश्वथामा के लेखक को मिला साहित्य अकादमिक पुरस्कार

हाल ही में, चमन अरोड़ा को उनकी पुस्तक "इक होर अश्वथामा" के लिए डोगरी में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है।



साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 में की गई थी। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाता है। यह अकादमी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। 

पहला पुरस्कार 1955 में दिया गया था।

यह पुरस्कार अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी प्रमुख भारतीय भाषा में प्रकाशित साहित्यिक दृष्टि से सबसे उत्कृष्ट रचनाओं के लिए दिया जाता है।

अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में संविधान की अनुसूची VIII के तहत सूचीबद्ध 22 भाषाएं तथा अंग्रेजी व राजस्थानी शामिल हैं।

पुरस्कार एक मंजूषा के रूप में होता है। इसमें एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका होती है और 1,00,000/-रुपये नकद दिए जाते है।

माउंट टर्नकी (Mount Taranaki) ज्वालामुखी को मिला जीवन का अधिकार

हाल ही में, न्यूजीलैंड में माउंट टर्नकी को न्यूजीलैंड में 'लीगल पर्सन' के रूप में मान्यता दी गई है। माउंट टर्नकी एक स्ट्रैटोवोलकैनो है।

स्ट्रैटोवोलकैनो को मिश्रित ज्वालामुखी भी कहते है। यह अधिक ऊंचा, खड़ा और शंक्वाकार ज्वालामुखी है। इसमें चिपचिपे मैग्मा और अवरुद्ध गैसों के बाहर निकलने से विध्वंसक उद्गार होता है।



माउंट टर्नकी के बारे में

माउंट टर्नकी को ब्रिटिश कैप्टन जेम्स कुक ने माउंट एग्मोंट नाम दिया था। हालांकि, अब इसे माओरी देशज लोगों को सम्मान देने के लिए टर्नकी मौंगा (Taranaki Maunga) नाम दिया गया है।

यह न्यूजीलैंड के एग्मोंट नेशनल पार्क में स्थित है।

माओरी देशज लोग इसे अपना पूर्वज मानते हैं। इसलिए, उनके लिए यह पवित्र पर्वत है।

माओरी आओटेरोआ / न्यूजीलैंड की स्थानिक एबोरिजिनल (मूलवासी) आदिवासी और देशज नृजाति हैं।

इससे पहले न्यूजीलैंड ने 2014 में ते उरेवेरा फॉरेस्ट (Te Urewera Forest) को "लीगल पर्सनहुड" का दर्जा प्रदान किया था। इस तरह किसी प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को "जीवन का अधिकार" (Living rights) देने वाला न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश है।

न्यूजीलैंड के बारे में

  • यह दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है।
  • राजधानी - वेलिंग्टन
  • मुद्रा - न्यूजीलैंड डॉलर
  • महाद्वीप - ओशिनिया

कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...