इक होर अश्वथामा के लेखक को मिला साहित्य अकादमिक पुरस्कार

हाल ही में, चमन अरोड़ा को उनकी पुस्तक "इक होर अश्वथामा" के लिए डोगरी में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है।



साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 में की गई थी। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाता है। यह अकादमी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। 

पहला पुरस्कार 1955 में दिया गया था।

यह पुरस्कार अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी प्रमुख भारतीय भाषा में प्रकाशित साहित्यिक दृष्टि से सबसे उत्कृष्ट रचनाओं के लिए दिया जाता है।

अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में संविधान की अनुसूची VIII के तहत सूचीबद्ध 22 भाषाएं तथा अंग्रेजी व राजस्थानी शामिल हैं।

पुरस्कार एक मंजूषा के रूप में होता है। इसमें एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका होती है और 1,00,000/-रुपये नकद दिए जाते है।

माउंट टर्नकी (Mount Taranaki) ज्वालामुखी को मिला जीवन का अधिकार

हाल ही में, न्यूजीलैंड में माउंट टर्नकी को न्यूजीलैंड में 'लीगल पर्सन' के रूप में मान्यता दी गई है। माउंट टर्नकी एक स्ट्रैटोवोलकैनो है।

स्ट्रैटोवोलकैनो को मिश्रित ज्वालामुखी भी कहते है। यह अधिक ऊंचा, खड़ा और शंक्वाकार ज्वालामुखी है। इसमें चिपचिपे मैग्मा और अवरुद्ध गैसों के बाहर निकलने से विध्वंसक उद्गार होता है।



माउंट टर्नकी के बारे में

माउंट टर्नकी को ब्रिटिश कैप्टन जेम्स कुक ने माउंट एग्मोंट नाम दिया था। हालांकि, अब इसे माओरी देशज लोगों को सम्मान देने के लिए टर्नकी मौंगा (Taranaki Maunga) नाम दिया गया है।

यह न्यूजीलैंड के एग्मोंट नेशनल पार्क में स्थित है।

माओरी देशज लोग इसे अपना पूर्वज मानते हैं। इसलिए, उनके लिए यह पवित्र पर्वत है।

माओरी आओटेरोआ / न्यूजीलैंड की स्थानिक एबोरिजिनल (मूलवासी) आदिवासी और देशज नृजाति हैं।

इससे पहले न्यूजीलैंड ने 2014 में ते उरेवेरा फॉरेस्ट (Te Urewera Forest) को "लीगल पर्सनहुड" का दर्जा प्रदान किया था। इस तरह किसी प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को "जीवन का अधिकार" (Living rights) देने वाला न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश है।

न्यूजीलैंड के बारे में

  • यह दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है।
  • राजधानी - वेलिंग्टन
  • मुद्रा - न्यूजीलैंड डॉलर
  • महाद्वीप - ओशिनिया

प्रयागराज का महाकुंभ क्षेत्र (Mahakumbh Area) बना यूपी का 76वां जिला

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में महाकुंभ क्षेत्र को नया जिला घोषित किया है। नवगठित जिले को "महाकुंभ मेला" (mahakumbh Mela) के नाम से जाना जाएगा। 



आगामी कुंभ मेले के प्रबंधन और प्रशासन को सुव्यवस्थित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। नये जिले बनाने की मंशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला 2024 के दौरान व्यक्त की थी। 

इस नए जिले के गठन के बाद उत्तर प्रदेश में कुल 76 जिले हो गए हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश का सबसे नया जिला संभल था जिसे 28 सितंबर, 2011 को गठित किया गया था।

नए जिले की अधिसूचना में प्रयागराज जिले की चार तहसीलों के 67 गांव शामिल है। नए जिले की अधिसूचना उत्तर प्रदेश प्रयागराज मेला अथॉरिटी एक्ट, 2017 के तहत जारी किया गया है।



सरकारी आदेश में कहा गया है, "महाकुंभ मेला जिले/क्षेत्र में, मेला अधिकारी, कुंभ मेला, प्रयागराज को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) एवं अन्य धाराओं के अंतर्गत कार्यपालक मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट एवं अपर जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त होंगी तथा उक्त संहिता या वर्तमान में लागू किसी अन्य कानून के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी तथा सभी श्रेणी के मामलों में कलेक्टर की सभी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार होगा।"


महाकुंभ मेले के बारे में

कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा समागम समारोह है। यह भारत में चार जगह पर किसी नदी के किनारे या उनके संगम पर लगते हैं; जैसे- उत्तराखंड में हरिद्वार, गंगा तट पर; उत्तर प्रदेश में प्रयाग, गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर; मध्य प्रदेश में उज्जैन, शिप्रा तट पर एवं महाराष्ट्र में नासिक, गोदावरी के तट पर। प्रत्येक जगह पर हर 12 साल पर कुंभ मेला लगता है, यानी प्रत्येक 4 साल पर किसी एक जगह कुंभ मेला लगता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अमृत (अमरता का पेय) की बूँदें कुंभ (बर्तन) में भरकर ले जाते समय चार स्थानों पर गिराई थीं। प्रयागराज सहित इन चार स्थानों को वर्तमान कुंभ मेले के स्थल के रूप में पहचाना जाता है।


कुंभ मेला नाम तथा उसमें परिवर्तन

कुंभ मेले का नाम चारों जगह पर अलग-अलग है। प्रयाग त्रिवेणी संगम पर लगने वाल मेले का नाम "कुम्भ मेला" पहले नहीं था, यह 19वीं शताब्दी के मध्य के बाद आया है। इसका पता अलग-अलग साक्ष्यों से लगता है।

चीनी यात्री व्हेन सॉन्ग अपने लेख में कुंभ मेले को सम्राट शिलादित्य (हर्ष) से जोड़कर उल्लेख किया है। उसने बताया है कि हर्ष हर 5 साल पर प्रयाग त्रिवेणी संगम पर एक अनुष्ठान का आयोजन करता था जिसमें अपनी सभी जमा पूंजी जनता में दान कर देता था।

19वीं शताब्दी से पहले प्रयाग में 12 साल के चक्र वाले कुंभ मेले का कोई रिकॉर्ड नहीं है। मत्स्य पुराण, चैतन्य चरित्रामृत, रामचरितमानस, तबकात-ए-अकबरी, आइन-ए-अकबरी, यादगा-ए-बहादुरी, खुलासत-उत-तवारीख और ब्रिटिश अभिलेख, सभी में इलाहबाद में लगने वाले केवल वार्षिक मेले का जिक्र है न की की कुंभ मेले का। हालांकि खुलासत-उत-तवारीख (लगभग 1695-1699) ने केवल हरिद्वार में होने वाले मेले के वर्णन के लिए "कुंभ मेला" शब्द का उपयोग किया है।

प्रयागराज में अशोक स्तंभ में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से कई शिलालेख हैं। लगभग 1575 ई. के आसपास, अकबर के काल के बीरबल ने एक शिलालेख जोड़ा जिसमें "प्रयाग तीर्थ राज में माघ मेले" का उल्लेख है।

इलाहाबाद में कुंभ मेले का सबसे पहला उल्लेख औपनिवेशिक युग के दस्तावेजों में 19वीं शताब्दी के मध्य के बाद ही मिलता है। 

कहा जाता है कि प्रयाग कुंभ मेले का नाम प्रयाग के साधु संतों ने हरिद्वार कुंभ मेले से उधार लिया है। हालांकि 12 दिसंबर 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एक प्रस्ताव लाकर अर्ध कुंभ का नाम बदलकर "कुंभ" तथा कुंभ को "महाकुंभ" कर दिया।

अतः अब प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर हर 144 साल पर लगने वाले मेले को "वृहत महाकुंभ",  हर 12 साल में लगने वाले कुंभ मेला को '"महाकुंभ मेला", हर 6 साल पर लगने वाल मेले को "कुंभ मेला" तथा प्रत्येक साल लगने वाल मेले को "माघ मेला" कहते हैं।


कुम्भ मेला का आयोजन

इलाहाबाद में माघ मेला हर सर्दियों में माघ में आयोजित किया जाता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। अर्ध कुंभ और महाकुंभ भी इसी समय आयोजित किए जाते हैं।



2013 का कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम था, जिसमें लगभग 120 मिलियन आगंतुक आए थे, जिसमें 10 फरवरी 2013 (मौनी अमावस्या के दिन) एक ही दिन में 30 मिलियन से अधिक लोग शामिल थे। यह दुनिया का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण समारोह था।

हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला आगामी महाकुंभ प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी, 2025 को समाप्त होगा। उत्तर प्रदेश का अनुमान है कि महाकुंभ 2025 में 400 मिलियन से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

2025 के महाकुंभ को "वृहद महाकुंभ" भी कहा जा रहा है। बृहद महाकुंभ 12 महाकुंभ के बराबर यानी 144 साल पर लगता है।


कुम्भ मेला का महत्व

  • इस त्यौहार/समारोह को पानी में एक अनुष्ठान डुबकी द्वारा चिन्हित किया जाता है, लेकिन यह कई मेलों, शिक्षा, संतों द्वारा धार्मिक प्रवचन, भिक्षुओं या गरीबों के सामूहिक भोजन और मनोरंजन तमाशे के साथ सामुदायिक वाणिज्य का उत्सव भी है।
  • यह समारोह दुनिया के सामने लोगों, धर्मों और संस्कृतियों का विशाल और शांतिपूर्ण समागम का उदाहरण पेश करता है।
  • पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार होता है।
  • लोगों को आजीविका और सरकार को राजस्व प्राप्त होता है।
  • लोगों के बीच एकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • दिसंबर, 2017 में यूनेस्को ने कुंभ को "मानव की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत" घोषित किया।


कुंभ मेला क्षेत्र में देखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण जगह/चीजें

  • तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का अशोक स्तंभ
  • अक्षय वट वृक्ष
  • अकबर का किला, जो अकबर द्वारा 1575 में यमुना नदी के किनारे बनवाया गया था।
  • नागवशुकी मंदिर
  • नदियों का संगम स्थल
  • बड़े हनुमान मंदिर
  • प्रशासनिक व्यवस्था


अर्मेनिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 104वाँ सदस्य बन गया है

अर्मेनिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 104वाँ पूर्ण सदस्य बन गया है। 



अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन एक वैश्विक अंतर-सरकारी संगठन है जो कार्बन-तटस्थ भविष्य के लिए सौर ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत और फ्रांस के बीच एक सहयोगात्मक पहल है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा समाधानों को लागू करके जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को एकजुट करना है। 

इसकी संकल्पना 2015 में पेरिस में COP21 के दौरान की गई थी। इसकी शुरुआत सबसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में उष्णकटिबंधीय देशों (जो कर्क और मकर रेखा के बीच में है) के लिए किया था। उन्होंने इन देशों को 'सूर्यपुत्र' (सूर्य के पुत्र) कहा था।

इसका क्षेत्र नवीकरणीय ऊर्जा में काम करना और जलवायु परिवर्तन से निपटना है। इसका मुख्यालय राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान, गुरुग्राम, हरियाणा में है।

इसने सौर ऊर्जा को बढ़ाने में प्रौद्योगिकी, वित्त और क्षमता से संबंधित बाधाओं को सामूहिक रूप से दूर करने के लिए कई देशों को एक साथ लाया है। इसका मिशन 2030 तक सौर निवेश में एक ट्रिलियन डॉलर को अपनाना है, साथ ही प्रौद्योगिकी और वित्तपोषण लागत को कम करना है। 

भारत दुनिया को अक्षय ऊर्जा समाधान प्रदान करके टिकाऊ ऊर्जा भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उत्तर प्रदेश पीसीएस 2024 की प्रारंभिक परीक्षा दो दिन कराने की आयोग के फैसले के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों ने मचाया बवाल

उत्तर प्रदेश PCS 2024 की प्रारंभिक परीक्षा और RO/ ARO 2023 की प्रारंभिक परीक्षा एक की बजाय दो दिन में कराने के UPPSC के फैसले को लेकर मचे बवाल के बीच प्रतियोगी छात्रों ने कई सवाल उठाए हैं। प्रतियोगी छात्रों का तर्क है कि जिस आयोग की भर्तियों की जांच CBI कर रही हो और जिसके ऊपर High Court में PCS-J जैसी प्रारंभिक परीक्षा की कॉपी बदलने और हेरफेर के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उसके मानकीकरण (Normalization) पर भरोसा क्यों और कैसे करें।



PCS 2024 के विज्ञापन में दो पालियों में पेपर आयोजित करने तथा मानकीकरण का कोई उल्लेख नहीं है। यह तब है जबकि Supreme Court की संवैधानिक पीठ का निर्णय है कि खेल का नियम बीच में नहीं बदला जा सकता है, यहां तो पूरा खेल ही बदल जा रहा है। पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में एक सी-सैट का पेपर होता है, जो क्वालीफाइंग प्रकृति का होता है। इस पेपर में नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) कैसे होगा, इस पर आयोग मौन है। प्रारम्भिक परीक्षा में अभ्यर्थियों को न तो उनका स्कोरकार्ड दिया जाता है और न ही आयोग की तरफ से फाइनल उत्तरकुंजी जारी की जाती है।

ऐसे में अभ्यर्थियों को न तो उनका अनुमानित अंक (रॉ स्कोर) पता होगा, न ही विवादित या हटाए गए प्रश्नों की संख्या। लोक सेवा आयोग को पहले से ही रिकॉर्ड न रखने, गलत प्रश्न बनाने, उत्तर कुंजी जारी न करने, समय पर अंकपत्र जारी न करने इत्यादि को लेकर अनेक मामलों में उच्च न्यायालय फटकार लगा चुका है। आयोग की सत्यनिष्ठा खुद ही कठघरे में है। ऐसे में आयोग नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से कैसे लागू करेगा, इसको लेकर अभ्यर्थी चिंतित हैं। छात्रों का तर्क है कि संघ लोकसेवा आयोग या अन्य कोई राज्य लोक सेवा आयोग जब इतने बड़े स्तर पर प्रक्रिया में बदलाव करते हैं तो उसकी सूचना एकाध वर्ष पहले ही दे देते हैं। यहां न किसी विशेषज्ञ से राय ली गई और न ही अभ्यर्थियों को इसकी पूर्व सूचना थी।

UPPSC अपना स्तर UPSC के बराबर करें

अभ्यर्थियों का तर्क है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को अपना स्तर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के बराबर करना चाहिए न कि खुद को Bank, SSC, Railway, Police जैसी परीक्षा की नकल करनी चाहिए। दो शिफ्ट में परीक्षा कराना सरकार की नीतियों के खिलाफ है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में पीसीएस जैसी विशिष्ट श्रेणी की परीक्षा को एक ही शिफ्ट में कराने पर सैद्धांतिक सहमति लिखित रूप में व्यक्त की गई थी। सरकार ने 19 जून 2024 के शासनादेश से पीसीएस की परीक्षा को मुक्त रखा है जिसमें परीक्षा केंद्रों के लिए कुछ मानक (जैसे परीक्षा केंद्रों की दूरी कलेक्ट्रेट से 10 किमी के भीतर हो) तय किए गए हैं। आखिर प्रदेश के केवल 41 जिलों में ही प्रारंभिक परीक्षा क्यों कराई जा रही है सभी जिलों में क्यों नहीं। लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी जैसे शहर दूर तक फैले हुए हैं, यहां परीक्षा केंद्रों के लिए दस किलोमीटर की सीमा बेमानी है।

प्रणाली में पारदर्शिता और स्पष्टता का अभाव

प्रतियोगी छात्रों का तर्क है कि आयोग की ओर से प्रस्तुत प्रणाली में पारदर्शिता और स्पष्टता का अभाव है। मानकीकरण का फॉर्मूला यूपीपीएससी ने किसी दूसरी परीक्षा से कॉपी किया है, स्वयं तैयार नहीं किया है। यूपीपीएससी की परीक्षा तीन चरणों में होती है। अक्सर मानकीकरण की प्रक्रिया वहां अपनाई जाती है जहां परीक्षा में प्राप्त अंकों से अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाती है, जबकि यूपीपीएससी की यह परीक्षा एक स्क्रीनिंग परीक्षा है। यदि मानकीकरण कारगर होता तो संघ लोक सेवा आयोग बहुत पहले इसे लागू कर चुका होता। पीसीएस/आरओ/एआरओ में 150-600 के बीच पद होते हैं। मानकीकरण के कारण अनेक योग्य अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे।

घर बैठे ऑनलाइन कपड़ें बेच कर हर महीनें लाखों रुपए कमा सकते है। बस इसके लिए आपको निम्नलिखित काम करना है।

ऑनलाइन कपड़े बेचने के लिए आपको कुछ महत्वपूर्ण चरणों का पालन करना होगा। यहाँ एक विस्तृत गाइड है:



बाजार अनुसंधान

ट्रेंड्स और मांग: वर्तमान फैशन ट्रेंड्स और ग्राहकों की मांग को समझें।

प्रतियोगिता: अन्य ऑनलाइन स्टोर्स और उनके उत्पादों का विश्लेषण करें।


बिजनेस प्लान

लक्ष्य बाजार: आपके कपड़ों के लक्षित ग्राहक कौन हैं (उम्र, लिंग, शैली आदि)?

ब्रांडिंग: आपके ब्रांड का नाम, लोगो, और ब्रांड की पहचान बनाएं।


प्रोडक्ट सोर्सिंग

 निर्माताओं और सप्लायर्स: विश्वसनीय निर्माताओं और सप्लायर्स से जुड़ें।

इन्वेंटरी मैनेजमेंट: स्टॉक को व्यवस्थित और प्रबंधित करने की योजना बनाएं।


ऑनलाइन स्टोर सेटअप

ई-कॉमर्स प्लेटफार्म: Shopify, WooCommerce, या BigCommerce जैसे प्लेटफार्म का चयन करें।

वेबसाइट डिजाइन: एक आकर्षक और उपयोगकर्ता-अनुकूल वेबसाइट डिजाइन करें।

प्रोडक्ट लिस्टिंग: उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों और विस्तृत विवरणों के साथ उत्पादों को लिस्ट करें।


मार्केटिंग और प्रमोशन

सोशल मीडिया: Instagram, Facebook, Pinterest आदि पर अपनी उपस्थिति बनाएं।

SEO: अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन के लिए ऑप्टिमाइज़ करें।

ईमेल मार्केटिंग: संभावित ग्राहकों को ईमेल के माध्यम से प्रमोशन्स और नए उत्पादों की जानकारी दें।


ऑर्डर फुलफिलमेंट

लॉजिस्टिक्स और शिपिंग: एक भरोसेमंद शिपिंग पार्टनर का चयन करें।

कस्टमर सर्विस: ग्राहकों की शिकायतों और प्रश्नों का समय पर और प्रभावी उत्तर दें।


वित्तीय प्रबंधन

 पेमेंट गेटवे: विभिन्न भुगतान विकल्प जैसे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, और वॉलेट्स को एकीकृत करें।

बुककीपिंग: अपने वित्तीय रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखें और नियमित रूप से अपडेट करें।


निरंतर सुधार

फीडबैक: ग्राहकों से फीडबैक लें और उसके अनुसार अपने उत्पादों और सेवाओं में सुधार करें।

डेटा एनालिटिक्स: बिक्री, ट्रैफिक, और अन्य महत्वपूर्ण डेटा का विश्लेषण करें ताकि आप अपने बिजनेस को बेहतर बना सकें।


इन सभी चरणों का पालन करके, आप अपने ऑनलाइन कपड़ों के बिजनेस को सफलतापूर्वक स्थापित और प्रबंधित कर सकते हैं।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत

हाल ही में, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और उनके विदेश मंत्री की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस दुर्घटना में राष्ट्रपति समेत कुल 9 लोगों की मौत हुई है।



यह घटना तब घटी जब रविवार को अज़रबैजान में किज कलासी और खोदाफरिन बांध का उद्घाटन करके तबरेज (पूर्वी अज़रबैजान प्रांत की राजधानी) लौट रहे थे। हालांकि उनके मौत की पुष्टि सोमवार को मलबा मिलने के बाद हुई।

बताया जाता है कि जहां पर हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था वहां मौसम काफी खराब था।


साजिश की आशंका

हालाँकि ईरानी सोशल मीडिया पर हेलीकॉप्टर क्रैश के पीछे साजिश होने की आशंका जताई जा रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह कैसे संभव है कि काफिले के दो हेलीकॉप्टर सुरक्षित पहुंच गए जबकि केवल रईसी का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ है। 

अमेरिका के एक सीनेटर का कहना है कि मेरी अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत हुई है, लेकिन उनके अनुसार साजिश के किसी सबूत की जानकारी नहीं है।


ईरान का खराब एविएशन सुरक्षा

अभी तक हेलीकॉप्टर क्रैश होने की वजह के बारे में पता नहीं चला है। लेकिन ईरान का एयर ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा का रिकॉर्ड काफी खराब है। इसकी एक वजह कई दशकों से लगाए जा रहे अमेरिकी प्रतिबंधों को माना जा रहा है। इन प्रतिबंधों के कारण ईरान का एविएशन सेक्टर कमजोर हुआ है।

आपको बता दें कि रईसी 'बेल 212' हेलीकॉप्टर पर सवार थे जो अमेरिका में बना था।

अतीत में ईरान के कई बड़े मंत्रियों और अधिकारियों की मौत प्लेन या हेलीकाप्टर दुर्घटना से हुई है। इसमें शामिल है- रक्षा और यातायात मंत्री, थल और वायु सेना के कमांडर।


क्या सच में अगला विश्वयुद्ध जल के मुद्दे पर होंगे?

हाल ही, में संयुक्त राष्ट्र ने 'विश्व जल विकास रिपोर्ट, 2024' जारी की है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, "इस बात का कोई निर्णायक सबूत नहीं है कि अगला युद्ध जल के मुद्दे पर होंगे।"

इस वर्ष की रिपोर्ट 'समृद्धि और शांति के लिए जल' विषय पर केंद्रित है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति

  • कृषि क्षेत्रक लगभग 70% ताजे जल की खपत के लिए जिम्मेदार है। पिछले 60 वर्षों में चाड झील 90% तक सिकुड़ गई है। हालांकि, साझा सतही जल पर सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन भूजल संसाधन संरक्षण की अभी भी गंभीर उपेक्षा की जा रही है।


2030 तक "सभी के लिए जल" से संबंधित सतत विकास लक्ष्य (SDG)-6 हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। दुनिया की 50% आबादी साल के किसी न किसी समय गंभीर जल संकट का सामना करती है। उत्तर-पश्चिम भारत और उत्तरी चीन खाद्य उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता से संबंधित जोखिमों के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन हॉटस्पॉट्स में शामिल हैं।

जल और समृद्धि के बीच विरोधाभास के मौजूद होने से सभी के लिए जल उपलब्ध करा पाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हम सभी जानते हैं कि विकसित जल संसाधन अवसंरचना से संवृद्धि और समृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, ऐसी अवसंरचना केवल सबसे अमीर देश ही वहन कर सकते हैं।

रिपोर्ट में की गई मुख्य सिफारिशेंः 

जल संसाधनों का संधारणीय प्रबंधन निम्नलिखित उपायों द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है:

  • सीमा-पार जल समझौते किए जाने चाहिए।
  • जल अवसंरचना में निजी निवेश बढ़ाया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार जल तक सार्वभौमिक पहुंच के लिए 2030 तक लगभग 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वार्षिक निवेश की आवश्यकता होगी।
  • उद्योगों में वस्तु उत्पादन को जल संसाधन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, टाटा केमिकल्स ने पुनर्चक्रण और बेहतर जल प्रबंधन के माध्यम से एक वर्ष के भीतर भूजल के उपयोग में 99.4% की कटौती की।

जल का "शांति और समृद्धि" से संबंध

जल और शांतिः 

जल संकट के निम्नलिखित दुष्परिणाम हो सकते हैं-

  • स्थानीय विवादों में वृद्धि जैसा कि अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में देखा जा रहा है।
  • अधिक प्रवासन से बसाहट वाले क्षेत्रों में तनाव बढ़ सकता है।
  • खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है।

जल और समृद्धिः

  • जल पर्यावरण को प्राकृतिक रूप में बनाए रखने में मदद करता है।
  • निम्न और निम्न मध्यम आय वाले देशों में लगभग 70-80% रोजगार जल पर निर्भर हैं।
  • पानी समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है। लड़कियां और महिलाएं जल संकट का सामना सबसे पहले करती हैं, क्योंकि यह उनकी शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और सुरक्षा को प्रभावित करता है।

UPSC सफलता की कहानी: चीनी मिल से सफलता तक, IAS अंकिता चौधरी की प्रेरक यात्रा, UPSC में AIR-14

'सफलता की कहानी' सीरीज के अंतर्गत आज मैं आप लोगों के लिए एक ऐसी लड़की की कहानी सुनाने जा रही हूँ जो हार और निराशा के बीच अदम्य साहस के साथ IAS बनी। उनका नाम है अंकिता चौधरी। वह एक चीनी मिल मजदूर की बेटी है। उन्होंने ने अपने दूसरे प्रयास में UPSC में AIR-14 हासिल की।

अपने पिता के अटूट समर्थन से, अंकिता ने यूपीएससी के लिए लगन से तैयारी की और 2017 में अपने पहले प्रयास में उपस्थित हुईं। हालांकि, वह असफल रहीं, जिससे उनके पास दो विकल्प बचे- या तो पढ़ाई छोड़ दें या अपनी गलती से सीखें और वापस आएं।

अंकिता चौधरी का एक चीनी मिल मजदूर की बेटी के रूप में साधारण शुरुआत से लेकर आईएएस अधिकारी के रूप में रैंक हासिल करने तक का सफर प्रेरणा की किरण के रूप में खड़ा है, जो कई महत्वाकांक्षी आत्माओं के लिए मार्ग को रोशन करता है। उनकी कहानी सिर्फ़ जीत की कहानी नहीं है, बल्कि मानवीय भावना के लचीलेपन का प्रमाण है, जो दिखाती है कि कैसे धैर्य और दृढ़ता से विपरीत परिस्थितियों में भी महानता का मार्ग बनाया जा सकता है।

हरियाणा के रोहतक के मेहम जिले में एक साधारण, निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंकिता का प्रारंभिक जीवन शैक्षणिक प्रतिभा से भरा हुआ था। एक दर्दनाक कार दुर्घटना में अपनी माँ की असामयिक मृत्यु के बाद त्रासदी के साये के बावजूद, अंकिता का हौसला अडिग रहा, जिसे उसके पिता के अटूट समर्थन से बल मिला। एक चीनी मिल में अकाउंटेंट के रूप में काम करते हुए, उन्होंने अंकिता में शिक्षा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के मूल्यों को स्थापित किया, और सबसे बुरे दिनों में भी उसके सपनों को संजोया।

अंकिता की शैक्षणिक यात्रा उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज के गलियारों से होते हुए ले गई, जहाँ उन्होंने रसायन विज्ञान में डिग्री हासिल की, इस दौरान उनके मन में भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिष्ठित रैंक में शामिल होने की उत्कट महत्वाकांक्षा थी। हालाँकि उन्होंने IIT दिल्ली में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू की, लेकिन उनका दिल IAS बनने के सपने को पूरा करने में दृढ़ रहा, और चुनौतियों के बीच भी उनकी एक लौ जलती रही।

अपनी माँ के निधन के बाद, अंकिता ने अपनी आकांक्षाओं के माध्यम से उनकी याद को सम्मान देने में सांत्वना और दृढ़ संकल्प पाया। अपने पिता के मार्गदर्शन और अपनी क्षमता में अटूट विश्वास के साथ, उन्होंने यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी की कठोर यात्रा शुरू की। यह रास्ता बिना किसी बाधा के नहीं था, क्योंकि 2017 में उनका पहला प्रयास निराशा में समाप्त हो गया था। फिर भी, प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए, अंकिता ने हार मानने के बजाय लचीलापन चुना, अपनी असफलताओं से ज्ञान प्राप्त करने और मजबूत बनने का संकल्प लिया।

शुरुआती असफलताओं से विचलित हुए बिना, अंकिता ने अपने प्रयासों को दोगुना कर दिया, अपने संकल्प को उत्कृष्टता की निरंतर खोज में लगा दिया। उनकी सावधानीपूर्वक तैयारी और अटूट समर्पण ने उनके दूसरे प्रयास में फल दिया, क्योंकि उन्होंने 2018 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में एक प्रभावशाली अखिल भारतीय रैंक (AIR-14) प्राप्त करते हुए नई ऊंचाइयों को छुआ। उनकी जीत न केवल एक व्यक्तिगत जीत के रूप में है, बल्कि अदम्य मानवीय भावना के एक वसीयतनामे के रूप में है, जो अनगिनत अन्य लोगों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने और सितारों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का फैसला सही है या गलत

सुखियां

हाल ही में, भारत चुनाव आयोग (ECI) ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री रहस्य कोष (CMRF) से संबंधित एक अहम फैसला लिया है।



भारत के निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री राहत कोष से किए जाने वाले कुछ आपातकालीन कार्यों को आदर्श आचार संहिता के दायरे से मुक्त कर दिया है।

इस कोष का उद्देश्य बड़ी प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं आदि से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करना है।


मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF)

प्रधान मंत्री राहत कोष के समान ही, यह कोष भी मुख्य रूप से सार्वजनिक और निजी संस्थानों, स्वैच्छिक संगठनों आदि से प्राप्त दान से संचालित होता है।

CMRF को दिए गए दान को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के तहत आयकर से 100% छूट प्राप्त है।


आदर्श आचार संहिता 

यह भारत के चुनाव आयोग द्वारा सरकार और राजनीतिक दलों के लिए बनाया गया नियम है, जिसे सभी राजनीतिक दलों को मानना अनिवार्य है।

यह नियम चुनाव घोषणा की तिथि से लेकर मतदान के अंतिम परिणाम आने तक लागू रहता है।

2024 के लोकसभा चुनाव के लिए यह 16 मार्च से लागू हो गया है।

आदर्श आचार संहिता के तहत निम्नलिखित नियम शामिल है:

  • सरकार के द्वारा लोक लुभावन घोषणाएँ नहीं करना।
  • चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग न करना।
  • राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के द्वारा जाति, धर्म व क्षेत्र से संबंधित मुद्दे न उठाना।
  • चुनाव के दौरान धन-बल और बाहु-बल का प्रयोग न करना।
  • आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति को धन का लोभ न देना।
  • आचार संहिता लागू हो जाने के बाद किसी भी योजनाओ को लागू नहीं कर सकते।

कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागया

हाल ही में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश सरकार ने नबालिकों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...